भोपाल: मध्यप्रदेश के रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 55 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक कारोबारी को मुंबई पुलिस और एटीएस का अधिकारी बनकर फोन किया और गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले की जांच करते हुए रतलाम पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपियों को हैदराबाद और एक को कर्नाटक के धारवाड़ से पकड़ा गया है। पुलिस ने ठगी की रकम में से करीब 20 लाख रुपये बैंक खातों में होल्ड भी करवा दिए हैं।
आईएसआई से संबंध होने का आरोप लगाकर डराया
पुलिस के अनुसार, पीड़ित कारोबारी कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं और फिलहाल रतलाम में रह रहे थे। 15 सितंबर को उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है।
आरोपी ने कारोबारी पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने का भी आरोप लगाया। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से फोन कर उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इस दौरान आरोपियों ने आधार कार्ड और पैन कार्ड की जानकारी भी हासिल कर ली।
पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल पर की पूछताछ
अगले दिन ठगों ने कारोबारी को बताया कि उनका मामला एटीएस विभाग को भेज दिया गया है। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने लोगों ने उनसे बातचीत की। आरोपियों ने हथियारों की तस्वीरें दिखाकर पूछताछ की और सुप्रीम कोर्ट के लेटरहेड पर बने फर्जी दस्तावेज भी भेजे।
इन दस्तावेजों और धमकियों के जरिए कारोबारी को विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई चल रही है। आरोपियों ने कहा कि जांच और सत्यापन के लिए कुछ बैंक खातों में रकम जमा करनी होगी, जिसे जांच पूरी होने के बाद वापस कर दिया जाएगा।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से कारोबारी ने अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए कुल 55 लाख रुपये जमा कर दिए।
बैंक खातों की जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
ठगी की शिकायत मिलने के बाद रतलाम के माणकचौक थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बैंक खातों, लेनदेन और तकनीकी जानकारी की जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि कारोबारी द्वारा भेजे गए 35 लाख रुपये एक बैंक खाते में पहुंचे थे। खाते से जुड़ी जानकारी के आधार पर पुलिस हैदराबाद पहुंची और एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद मिले साक्ष्यों के आधार पर दूसरे आरोपी को कर्नाटक के धारवाड़ से पकड़ा गया।
वहीं, ठगी के पांच लाख रुपये दूसरे स्तर के बैंक खाते में ट्रांसफर होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया। इस तरह मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
20 लाख रुपये होल्ड, अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम में से करीब 20 लाख रुपये संबंधित बैंक खातों में होल्ड करवा दिए हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि बाकी रकम किन खातों में भेजी गई और कितनी राशि निकाली जा चुकी है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ पुलिस इस साइबर ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। इसके अलावा जांच के नाम पर बैंक खातों में पैसे जमा कराने की मांग भी नहीं की जाती।
पुलिस ने कहा कि इस तरह का फोन आने पर तुरंत कॉल काट दें और अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते रकम को होल्ड कराया जा सके।

