मुंबई: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने 90 के दशक के बॉलीवुड के दिनों को याद करते हुए उस दौर का एक पुराना किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में काम करना इतना आसान नहीं था, क्योंकि कई लोगों को अंडरवर्ल्ड की तरफ से धमकियों का सामना करना पड़ता था।
संजय गुप्ता के मुताबिक, धमकियां सिर्फ फोन तक सीमित नहीं रहती थीं। कई बार अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग सीधे फिल्म की शूटिंग वाली जगह पर भी पहुंच जाते थे। उस दौर में फिल्म बनाने वाले लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियों के बीच काम करना काफी मुश्किल होता था।
शाहरुख खान ने कथित तौर पर नहीं माना दबाव
संजय गुप्ता ने दावा किया कि उस दौर में शाहरुख खान को भी अंडरवर्ल्ड की तरफ से दबाव का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक, शाहरुख ने किसी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह अंडरवर्ल्ड के कहने पर फिल्म या शो नहीं करेंगे।
गुप्ता ने शाहरुख के कथित जवाब को याद करते हुए कहा, “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो।” फिल्ममेकर के अनुसार, शाहरुख के इस रवैये की वजह से अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग भी उनका सम्मान करने लगे थे।
संजय गुप्ता को भी मिली थी धमकी
संजय गुप्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1992-93 के दौरान उन्हें भी धमकी भरा फोन आया था। उस समय वह ‘आतिश’ और ‘रामशास्त्र’ पर काम कर रहे थे। फोन करने वाले ने खुद को ‘नाना’ बताया था, जिसके बाद उन्हें पता चला कि कॉल छोटा राजन से जुड़ा था।
उन्होंने बताया कि स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने अभिनेता संजय दत्त से मदद मांगी। इसके बाद सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी से उन्हें घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
विवाद की वजह बना था फिल्म का रोल
बाद में अभिनेता आदित्य पंचोली ने उन्हें बताया कि दोस्तों के बीच हुई बातचीत के बाद ‘रामशास्त्र’ में उनके किरदार को बेहतर करने की बात कही गई थी। इसके बाद कथित तौर पर गुप्ता पर दबाव बनाया गया।
हालांकि, यह पूरा विवरण संजय गुप्ता द्वारा हालिया बातचीत में सुनाया गया उनका व्यक्तिगत अनुभव है। शाहरुख खान की ओर से इस विशेष पुराने प्रसंग पर कोई नया स्वतंत्र बयान सामने नहीं आया है।

