बैहर। बालाघाट जिले की बैहर तहसील में इन दिनों एक सेवानिवृत्त वनकर्मी की कथित दबंगई चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप है कि पूर्व वनकर्मी ने ग्राम पंचायत की निस्तारी एवं अतिचराई घास भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है और अब सरकारी जमीन पर लगातार अतिक्रमण बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर दबाव बनाया जा रहा है और प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नायब तहसीलदार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बजाय जेसीबी मशीन से गड्ढे खुदवाने और कार्रवाई को रोकने में सहयोग किया जा रहा है। यही वजह है कि अतिक्रमणकर्ता के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2024-25 से ग्रामीण लगातार आवेदन और शिकायतें देकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की कथित लापरवाही से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और वे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, मुख्यालय बैहर तहसील से महज 45 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बोदा मे लगभग 8 एकड़ शासकीय घास एवं ग्राम पंचायत की निस्तारित और अतिचराई भूमि को सेवानिवृत वन कर्मी अतीत दास संत ग्राम बोदा निवासी के द्वारा अतिक्रमण कर घर खेत का निर्माण कर रहा है, जिसका पहन. 54 खसरा 17/12 रकबा 2.841 हेक्टेयर है। लम्बे अरसे से ग्रामीणों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि अतिक्रमण हटाया जाए। लेकिन भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी के चलते आज तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही अपने अंजाम तक नहीं पहुंची है। जबकि अतिक्रमणकारी स्वयं शासकीय सेवा से लाभ पाकर सेवा निवृत्त हुआ है और परिवार के अन्य सदस्य भी शासकीय सेवा का लाभ ले रहे है। बावजूद इसके एक बड़े रकबे को कब्ज़ा कर लगातार अतिक्रमण करना कही ना कही राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत को दर्शाता है, जिसके चलते ग्रामीणों की मांग और निवेदनों पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हो रही है।

आखिर क्यों नायब तहसीलदार दे रहे संरक्षण!
तत्कालीन नायब तहसीलदार जब से गद्दी में पदस्थ हुए है तब से जनता बेहद परेशान नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, नायब तहसीलदार उन लोगो का काम करता है, जो उनको पैसा देता है। फिर उसके बाद गलत को सही और सही को गलत भी कर देता है। पैसो की चमक निष्ठापूर्ण कार्य को बेहद प्रभावित कर रही है, जहाँ दर्जनों समस्याए आज भी व्याप्त नजर आ जाएगी। जिसका ताज़ा उदाहरण ग्राम बोदा मे अतीत दास संत के द्वारा किया गया अतिक्रमण मामला है जो शिकायत के बाद भी आज तक अतिक्रमणकारी परिवार पर ना तो कोई कार्यवाही हुई है और ना ही, किसी प्रकार का अतिक्रमण हटाया गया है!
कलेक्टर ने दिए एसडीएम को जांच के आदेश
बैहर मे लगातार अतिक्रमण मामले मे हो रही शिकायत के बाद भी राजस्व अधिकारी द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही ना करना कही ना कही साठगाठ को दर्शाता है। राजस्व अधिकारी बैहर द्वारा मामले को नजरअंदाज किये जाने को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा कलेक्टर महोदय बालाघाट को लिखित शिकायत में मामले की पूरी जांच कर अतिक्रमण हटाए जाने को लेकर निवेदन किया गया था। जिसमे कलेक्टर महोदय बालाघाट ने अनुविभागीय राजस्व अधिकारी बैहर को एक ज्ञापन पत्र जारी कर शीघ्र जांच के आदेश देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहाँ गया था। राजस्व अधिकारी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया या नहीं, लेकिन आदेश के दो माह बाद भी अतिक्रमणकारियों पर ना तो किसी प्रकार की कार्यवाही की गई और ना ही उक्त भूमि पर खोदे गए गड्ढे भरे गए। किसी प्रकार की कार्यवाही ना होने के कारण सेवानिवृत वनकर्मी अतीतदास संत की दबंगई अतिक्रमण को लेकर बढ़ते ही जा रही है।

