उज्जैन। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र आज, 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में व्रत, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और नियमित पूजा करने से सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और माता रानी की कृपा प्राप्त होती है। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होने की मान्यता है, जिसे सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है। शास्त्रों में प्रात:काल घटस्थापना को विशेष महत्व दिया गया है। इस बार 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र रात 10:32 बजे तक और वैधृति योग रात 9:05 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चित्रा नक्षत्र के शुरुआती दो चरणों को छोड़कर अथवा अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करना शुभ माना जाता है।
घटस्थापना के प्रमुख मुहूर्त
- चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:04 बजे से 11:55 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक।
घटस्थापना के मुहूर्त की गणना में स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।
घर पर ऐसे करें कलश स्थापना
नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद निम्न विधि से घटस्थापना करें।
- पूजा स्थल पर साफ मिट्टी से भरा पात्र रखें और उसमें जौ के बीज बोएं।
- कलश के बाहर मौली बांधें और उस पर रोली से तिलक लगाएं।
- कलश में स्वच्छ जल और थोड़ा गंगाजल डालें। श्रद्धानुसार सुपारी और सिक्का भी रख सकते हैं।
- कलश के मुंह पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।
- नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
- कलश और जौ की स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और पूजा-अर्चना शुरू करें।
- नवरात्र के दौरान जौ में आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव करते रहें।
नवरात्र पूजा की सामग्री
घटस्थापना और मां दुर्गा की पूजा के लिए जल, गंगाजल, कलश, मौली, सुपारी, दूर्वा, जटा वाला नारियल, लाल चुनरी, माता के वस्त्र और श्रृंगार सामग्री रखें। इसके अलावा फूल-माला, पान, साबुत चावल, रोली, कुमकुम, मिट्टी का पात्र, जौ, दीपक, रुई की बत्ती, घी या तिल का तेल, कपूर, धूप-बत्ती, फल, मिठाई और बताशे की व्यवस्था करें। श्रद्धानुसार दान की सामग्री भी रखी जा सकती है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और भोग
नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री वृषभ पर सवार रहती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी आराधना से मन में स्थिरता, दृढ़ता और सकारात्मकता आती है।
पूजा के लिए सबसे पहले मां को लाल चुनरी अर्पित करें। इसके बाद फूल, अक्षत, रोली, इत्र और फल-मिठाई चढ़ाएं। दीप प्रज्ज्वलित कर मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में मां की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करें। मां शैलपुत्री को परंपरानुसार गाय के दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है।
नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।
- पहला दिन – मां शैलपुत्री: स्थिरता और दृढ़ता की प्रतीक।
- दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी: तपस्या, ज्ञान और संयम की अधिष्ठात्री।
- तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा: साहस और निर्भयता प्रदान करने वाली।
- चौथा दिन – मां कूष्मांडा: आयु, आरोग्य और तेज की प्रतीक।
- पांचवां दिन – मां स्कंदमाता: वात्सल्य और संतान सुख की प्रतीक।
- छठा दिन – मां कात्यायनी: शक्ति और विजय की अधिष्ठात्री।
- सातवां दिन – मां कालरात्रि: भय और अंधकार का नाश करने वाली।
- आठवां दिन – मां महागौरी: शुद्धता, शांति और समृद्धि की प्रतीक।
- नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री: सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली।
हाथी पर मां दुर्गा के आगमन की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। देवी भागवत पुराण से जुड़ी प्रचलित मान्यताओं में हाथी को सुख-समृद्धि, धैर्य और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इसे कृषि समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से शुभ संकेत मानते हैं।
नवरात्र में पूजा-पाठ का विशेष महत्व
नवरात्र केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और शक्ति की उपासना का अवसर भी है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं और मां दुर्गा की आरती तथा चालीसा का पाठ करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि सच्चे मन से की गई आराधना से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मकता और आत्मबल मिलता है। नवरात्र के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और देवी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में भी सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया है।

