जकार्ता। नए साल के साथ इंडोनेशिया में एक नया आपराधिक कानून लागू होने जा रहा है, जिसने देश और दुनिया में बहस छेड़ दी है। शादी से पहले संबंध बनाना हो या सरकार की आलोचना, अब ये सब अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों को इस कानून से अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरे की आशंका है।
मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में 2 जनवरी से लागू हो रहा नया आपराधिक कानून देश की कानूनी और सामाजिक दिशा को बदलने वाला माना जा रहा है। यह 345 पन्नों का कानून डच औपनिवेशिक दौर के पुराने कानूनों की जगह लेगा, लेकिन इसके कई प्रावधान विवादों में हैं।
नए कानून के तहत शादी से पहले यौन संबंध बनाना अपराध होगा, जिसकी सजा एक साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि, इसमें शर्त रखी गई है कि मामला तभी दर्ज होगा जब आरोपी के पति, पत्नी, माता-पिता या बच्चे शिकायत करें। सरकार का कहना है कि इससे निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होगा।
इसके अलावा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सरकारी संस्थानों का अपमान करने पर तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। कम्युनिज्म जैसे विचारधाराओं के प्रचार को भी अपराध माना गया है, जिसकी सजा चार साल तक हो सकती है।
सरकार का दावा है कि यह कानून देश की सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप है। कानून मंत्री सुप्रतमान आंदी अग्तास ने माना कि दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन जनता की सतर्कता से इसे रोका जा सकता है।
वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘अपमान’ और ‘मानहानि’ की परिभाषा बहुत व्यापक है, जिससे सरकार की आलोचना करने वालों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। कई विशेषज्ञों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरा बताया है।
निजी जिंदगी से राजनीति तक सख्तीः इंडोनेशिया में नया कानून बना बहस की वजह


