नोएडा। जब न्याय मांगने वाला खुद थाने में असुरक्षित हो जाए, तो सवाल सिर्फ एक महिला का नहीं, पूरे सिस्टम का होता है। नोएडा की इस घटना ने पुलिसिया सत्ता और कानून की सीमाओं पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
नोएडा के सेक्टर-126 थाने में महिला वकील को कथित तौर पर 14 घंटे तक अवैध हिरासत में रखने और यौन शोषण के आरोपों ने देश की सर्वोच्च अदालत को हस्तक्षेप के लिए मजबूर कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि थाने के सीसीटीवी फुटेज किसी भी हाल में न हटाए जाएं। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने पिस्तौल गर्दन पर रखकर मोबाइल का पासवर्ड मांगा और फर्जी मुठभेड़ की धमकी दी।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताया। अदालत ने कहा कि अगर राजधानी के पास यह हाल है, तो बाकी देश की कल्पना की जा सकती है। यह मामला सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि पुलिस जवाबदेही की अग्निपरीक्षा है। सवाल यही है, क्या कानून की रखवाली करने वाले खुद कानून से ऊपर हैं?
महिला वकील के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से जवाब तलब


