रेत माफिया पर जिला प्रशासन की सख्ती, लांजी में दो ट्रैक्टर जब्त

बालाघाट। जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन ने कमर कस ली है। नदी-नालों से चोरी-छिपे रेत निकालने वालों पर शिकंजा कसता जा रहा है। लांजी तहसील के ग्राम पौनी में हुई ताजा कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब अवैध खनन बर्दाश्त नहीं होगा।
बालाघाट जिले में रेत के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। कलेक्टर मृणाल मीना के स्पष्ट निर्देशों के बाद खनिज विभाग सक्रिय मोड में है और जिले के अलग-अलग इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। इसी कड़ी में 18 दिसंबर को लांजी तहसील अंतर्गत ग्राम पौनी में बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे दो ट्रैक्टर जब्त किए गए।
प्रशासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर रेत का खनन और परिवहन किया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खनिज विभाग की टीम ने ग्राम पौनी क्षेत्र में छापामार कार्रवाई की।
उपसंचालक खनिज सुश्री फरहत जहां ने जानकारी देते हुए बताया कि खनिज निरीक्षक सुरेश कुमार कुलस्ते के नेतृत्व में खनिज अमले ने मौके पर दबिश दी। टीम में परसाराम काकोटे, कन्हैयालाल पटले, ओरीलाल और धन्नू डोहरे शामिल थे। कार्रवाई के दौरान रेत से लदे दो ट्रैक्टर बिना वैध अनुमति के परिवहन करते पाए गए।
जब्त किए गए वाहनों में ट्रैक्टर क्रमांक एमपी-50-आरके-7285 शामिल है, जिसे प्रमोद ठाकरे (21वर्ष), निवासी कोसमदेही, चला रहा था। वहीं दूसरा ट्रैक्टर क्रमांक एमपी-50-आरएम-8388 सुरेश नेवारे (34वर्ष), निवासी पौनी, द्वारा संचालित किया जा रहा था। दोनों ही मामलों में चालक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया गया।
जब्त वाहनों को थाना लांजी की अभिरक्षा में सुरक्षित खड़ा कराया गया है। साथ ही वाहन मालिकों और चालकों के विरुद्ध मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए मामला कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संसाधनों की रक्षा के लिए ऐसी कार्रवाइयां आगे भी लगातार जारी रहेंगी। प्रशासन की इस सख्ती से रेत माफियाओं में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।