भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में युवाओं के बीच एक बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है, जिसे ‘ब्लड किक’ कहा जा रहा है। यह कोई पारंपरिक नशा नहीं, बल्कि ऐसा जोखिम भरा व्यवहार है जिसमें युवा अपनी ही नसों से खून निकालकर उसे दोबारा शरीर में इंजेक्ट कर “किक” महसूस करने की कोशिश करते हैं। मेडिकल विशेषज्ञ इसे ‘ऑटोहेमोथेरेपी एब्यूज’ बताते हैं और इसे गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट मान रहे हैं।
हमीदिया अस्पताल से सामने आए चौंकाने वाले केस
जानकारी के मुताबिक, हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विभाग में हाल के महीनों में ऐसे कई केस सामने आए हैं, जिन्होंने डॉक्टरों को भी चौंका दिया। युवा मरीजों ने कबूल किया कि वे खुद खून निकालकर दोबारा चढ़ाते हैं, क्योंकि उन्हें इससे “एनर्जी बूस्ट” और अजीब सा सुकून महसूस होता है, हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
क्या है ‘ब्लड किक’?
मनोचिकित्सकों के अनुसार, यह कोई इलाज नहीं बल्कि ‘बिहेवियरल एडिक्शन है’। इस प्रक्रिया में दर्द और राहत का मिश्रण दिमाग को एक “रिवार्ड सिग्नल” देता है, जिससे व्यक्ति बार-बार इसे दोहराने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत एक खतरनाक लत में बदल जाती है, जहां व्यक्ति वास्तविकता और भ्रम के बीच फर्क खोने लगता है।
जानलेवा खतरे
बता दें डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ‘ब्लड किक’ के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं और यह शरीर के प्राकृतिक सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ सकता है-
- सेप्सिस और जानलेवा संक्रमण
- HIV और हेपेटाइटिस का खतरा
- नसों को स्थायी नुकसान
- खून की कमी (एनीमिया)
- ब्लड क्लॉट और ऑर्गन फेल्योर
- अचानक मौत का जोखिम
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह लत अक्सर डिप्रेशन, सेल्फ-हार्म टेंडेंसी और अटेंशन सीकिंग बिहेवियर से जुड़ी होती है। खुद को दर्द देकर राहत ढूंढना मानसिक असंतुलन का संकेत है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
इसको लेकर डॉक्टरों का साफ कहना है कि इसका इलाज किसी दवा या “किक” में नहीं, बल्कि काउंसलिंग, थेरेपी और परिवार के सपोर्ट में है। समय रहते पहचान और सही मार्गदर्शन से इस लत से बाहर निकला जा सकता है।

