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नर्सिंग घोटाले की वजह से पहले से‌ ही हजारों नर्सिंग छात्रों का भविष्य अधर में, फिर भी नए फर्जी कालेजों को मिल रही मान्यता – रवि परमार

भोपाल:मध्यप्रदेश के सीधी जिले की कुसमी तहसील के भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), भोपाल के संयुक्त निदेशक , मुख्यमंत्री समेत विभाग के तमाम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है।

भाजपा सांसद के परिवार के लोगों द्वारा कॉलेज संचालन का आरोप

रवि परमार ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज का संचालन अनुप मिश्रा , बीना मिश्रा , वैष्णवी मिश्रा , शरद पाठक , राजेश सिंह चौहान रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी द्वारा सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सांसद पुत्र और उनके करीबियों को नियम विरुद्ध नर्सिंग कॉलेज की मान्यता प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन एवं मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल रजिस्ट्रार और अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर काम किया।

NSUI ने CBI से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

रवि परमार ने बताया कि NSUI ने CBI से मांग की है कि कॉलेज के स्वामित्व, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की जाए।

निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता कैसे?- NSUI

NSUI की शिकायत के अनुसार कॉलेज द्वारा B.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया गया था।परमार का कहना है कि जिस समय कॉलेज की मान्यता की प्रक्रिया हुई, उस समय कॉलेज का भवन निर्माणाधीन था और वर्तमान में भी निर्माणाधीन हैं । इसके बावजूद निरीक्षण दल द्वारा कॉलेज को मान्यता के लिए उपयुक्त पाया गया।किस रवि परमार ने सवाल उठाया कि यदि निरीक्षण के समय भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य पाया?

NSUI ने CBI से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

रवि परमार ने बताया कि NSUI ने CBI से मांग की है कि कॉलेज के स्वामित्व, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की जाए

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