पांढुर्णा: शहर के गांधी वार्ड में रविवार को एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। यहां तीन बहनों ने अपने इकलौते भाई सुरेश पूरा राघोबजी कोल्हे की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार की रस्में खुद निभाईं। एक बहन ने भाई की अर्थी को कंधा दिया, दूसरी ने अंतिम संस्कार की टी-कांडी संभाली, जबकि तीसरी बहन ने मोक्षधाम पहुंचकर मुखाग्नि देकर भाई को अंतिम विदाई दी।
सुरेश तीन बहनों के इकलौते भाई थे। बीमारी के चलते रविवार को उनका निधन हो गया। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में अब मां यमुनाबाई और तीन बेटियां अनुसाया, चंद्रकला और रेखा रह गई हैं।
बहन ने अर्थी को कंधा देकर निभाया फर्ज
सुरेश की अंतिम यात्रा गांधी वार्ड स्थित उनके घर से मोक्षधाम के लिए निकली। इस दौरान बहन अनुसाया ने भाई की अर्थी को कंधा दिया। वहीं चंद्रकला ने अंतिम संस्कार की टी-कांडी संभाली। मोक्षधाम पहुंचने के बाद तीसरी बहन रेखा ने भाई को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान छलकते रहे आंसू
भाई की अंतिम यात्रा के दौरान तीनों बहनें बेहद भावुक नजर आईं। अर्थी को कंधा देने से लेकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करने तक उनकी आंखों से आंसू छलकते रहे। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल लोग भी भावुक हो गए।
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बोलीं- अंतिम समय में फर्ज निभाना हमारा कर्तव्य था
तीनों बहनों ने कहा कि उनका भाई अब उनके बीच नहीं है, लेकिन उसके अंतिम समय में अपने भाई के प्रति फर्ज निभाना उनका कर्तव्य था। इकलौते भाई के निधन से परिवार में गम का माहौल है। सुरेश के जाने के बाद मां यमुनाबाई और तीनों बहनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

