ग्वालियर: ग्वालियर स्थित मध्य भारत खादी संघ में भारतीय मानकों के अनुरूप खादी के राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। यहां बने तिरंगे मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों में भेजे जाते हैं। 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, उस साल अब तक यहां से 50 हजार से ज्यादा तिरंगे 20 राज्यों में भेजे जा चुके थे।
चरखा संघ से शुरू हुआ सफर
मध्य भारत खादी संघ के इतिहास को लेकर उपलब्ध स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक संस्था की शुरुआत 1925 में चरखा संघ के रूप में हुई थी, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्टें इसकी स्थापना 1930 में बताती हैं। बाद में 1956 में इसे मध्य भारत खादी संघ के रूप में आयोग का दर्जा मिला।
राष्ट्रीय ध्वज निर्माण की दिशा में बड़ा पड़ाव वर्ष 2016 रहा, जब संस्था को भारतीय मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय ध्वज बनाने की मान्यता मिली। इसके बाद ग्वालियर राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो गया।
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ग्वालियर में कैसे बनता है तिरंगा?
ग्वालियर में तैयार होने वाला तिरंगा सिर्फ कपड़े की सिलाई तक सीमित नहीं है। इसके निर्माण में कई चरण शामिल होते हैं।
सबसे पहले खादी का कपड़ा तैयार किया जाता है। इसके बाद उसकी कटिंग, सिलाई, रंग और अशोक चक्र से जुड़े मानकों की जांच की जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, तैयार ध्वज को करीब 20 तरह की टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है। कपड़े की गुणवत्ता, रंग, आकार और अशोक चक्र का माप जैसे मानकों की बारीकी से जांच की जाती है।
एक तिरंगा तैयार होने में आकार और प्रक्रिया के हिसाब से कई दिन लग सकते हैं। 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर इकाई में तैयार होने वाले प्रमुख आकारों में 2×3, 3×4.5 और 4×6 फीट के ध्वज शामिल हैं।
90 फीसदी महिलाएं संभालती हैं निर्माण का काम
ग्वालियर की इस इकाई की एक खास बात यहां काम करने वाली महिला कारीगर हैं। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज निर्माण से जुड़े कर्मचारियों में करीब 90 फीसदी महिलाएं हैं।
ये महिलाएं कपड़े की कटिंग से लेकर सिलाई और टेस्टिंग तक की प्रक्रिया में शामिल रहती हैं। यानी तिरंगे की हर सिलाई के पीछे स्थानीय कारीगरों की मेहनत और हुनर जुड़ा हुआ है।
2025 में 20 राज्यों तक पहुंचा ग्वालियर का तिरंगा
ग्वालियर में तैयार होने वाले राष्ट्रीय ध्वज की पहुंच लगातार बढ़ी है। 2024 में रिपोर्टों के मुताबिक करीब 12,500 तिरंगे 16 राज्यों में भेजे गए थे। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य शामिल थे।
2025 में यह संख्या और बढ़ी। उस साल अब तक 50 हजार से ज्यादा तिरंगे 20 राज्यों में भेजे जा चुके थे और इनकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
देश में राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाले चुनिंदा केंद्रों में ग्वालियर
भारत सरकार के अनुसार, भारतीय मानक-1 के राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए बीआईएस लाइसेंस रखने वाली खादी संस्थाओं में मध्य भारत खादी संघ, ग्वालियर भी शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ फेडरेशन, हुबली; खादी डायर्स एंड प्रिंटर्स, बोरीवली और धारवाड़ तालुक गरग क्षेत्रीय सेवा संघ भी सूची में हैं।
इससे ग्वालियर की भूमिका सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह राष्ट्रीय ध्वज निर्माण की आधिकारिक व्यवस्था का हिस्सा बनता है।
क्या लाल किले पर भी ग्वालियर का तिरंगा फहराया जाता है?
इस दावे को लेकर सावधानी जरूरी है। कई मीडिया रिपोर्टों में ग्वालियर में बने तिरंगे के लाल किले, संसद और अन्य महत्वपूर्ण इमारतों तक पहुंचने की बात कही गई है।
हालांकि, केंद्र सरकार की एक आधिकारिक जानकारी के अनुसार 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से फहराया जाने वाला ध्वज एक विशेष रेशमी राष्ट्रीय ध्वज होता है, जिसे 2023 में आयुध वस्त्र फैक्टरी, शाहजहांपुर ने बनाया था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि लाल किले पर हर साल फहराया जाने वाला ध्वज अनिवार्य रूप से ग्वालियर में ही तैयार होता है।

