नई दिल्ली: तिरुपति के लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल के मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आरोपी महाराष्ट्र के डेयरी कारोबारी माचिंद्र शांताराम लंके की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मुकदमे को दूसरे राज्य में स्थानांतरित करना उचित नहीं होगा।
लंके मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मामले को लेकर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री लगातार बयान दे रहे हैं। इससे निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने मुकदमे को किसी पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की।
वकील बोले- राजनीतिक बयानबाजी से माहौल खराब
सिद्धार्थ दवे ने अदालत में कहा कि यह मामला राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में घी में पशु चर्बी होने की बात खारिज किए जाने के बावजूद राजनीतिक नेता लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे माहौल में निष्पक्ष सुनवाई और अभियोजन की उम्मीद करना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर आरोपी उत्तर भारत के रहने वाले हैं। ऐसे में उन्हें भाषा संबंधी परेशानी भी हो सकती है। वकील ने दलील दी कि राजनीतिक नेताओं की लड़ाई में आरोपियों को इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है।
SC ने कहा- गवाह आंध्र प्रदेश के रहने वाले
पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले के कई गवाह आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। ऐसे में मुकदमे को दूसरे राज्य में भेजने से सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष सुनवाई में किसी तरह की परेशानी आती है तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत आ सकता है।
हालांकि, पीठ ने फिलहाल मुकदमे को स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह ट्रायल दूसरी जगह भेजने के पक्ष में नहीं है।
2024 में विवाद के बाद गठित हुई थी स्वतंत्र SIT
तिरुपति लड्डू में पशु चर्बी के इस्तेमाल का आरोप सितंबर 2024 में सामने आया था। आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पिछली सरकार के दौरान लड्डू बनाने में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया।
इस आरोप के बाद राज्य में सियासी घमासान शुरू हो गया था। वाईएसआर कांग्रेस ने नायडू पर राजनीतिक फायदे के लिए झूठे आरोप लगाने का पलटवार किया था। वहीं, तेलुगु देशम पार्टी ने अपने दावे के समर्थन में प्रयोगशाला की रिपोर्ट सार्वजनिक की थी।
विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की थी। इस टीम ने आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से 26 सितंबर 2024 को बनाई गई एसआईटी की जगह ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं इस मामले से जुड़ी हैं और इसे राजनीतिक लड़ाई का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए।

