नई दिल्ली: ट्रेन के घंटों लेट होने से परेशान एक यात्री को कंज्यूमर कोर्ट से राहत मिली है। झारखंड के सरायकेला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को कुल 35 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। मामला इस्पात एक्सप्रेस से जुड़ा है, जो अपने तय समय से 8 घंटे 48 मिनट की देरी से संबलपुर पहुंची थी।
सितंबर 2024 का है मामला
शिकायतकर्ता ने सितंबर 2024 में टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में दो टिकट बुक किए थे। ट्रेन को सुबह 10:18 बजे टाटानगर से रवाना होकर दोपहर 3:50 बजे संबलपुर पहुंचना था। लेकिन ट्रेन समय पर नहीं पहुंच सकी। संबलपुर पहुंचने में 528 मिनट यानी 8 घंटे 48 मिनट की देरी हुई। यात्री का कहना था कि इतनी लंबी देरी के कारण उसे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद यात्री ने रेलवे को कानूनी नोटिस भेजा और उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर करीब 4.50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की।
रेलवे ने कोर्ट में क्या कहा?
रेलवे ने अपनी दलील में कहा कि यात्री ने ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि ट्रेन की देरी के कारण उसे वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ। रेलवे ने मामले के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी सुनवाई रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के तहत होनी चाहिए।
हालांकि, आयोग ने रेलवे की यह दलील स्वीकार नहीं की। आयोग ने कहा कि रेलवे यह साबित नहीं कर पाया कि ट्रेन की देरी ऐसी परिस्थितियों के कारण हुई थी, जो उसके नियंत्रण से बाहर थीं।
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30 हजार मुआवजा, 5 हजार मुकदमे का खर्च
आयोग ने रेलवे को यात्री को मानसिक और अन्य परेशानियों के लिए 30 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने को कहा गया है।
इस तरह रेलवे को कुल 35 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। आयोग ने इसके लिए 45 दिनों का समय दिया है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर राशि पर 12% सालाना ब्याज भी देना होगा।

