बालाघाट: एक जुलाई को हुई आगजनी की घटना में पुलिस द्वारा पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों के बाद नौ और लोगों की गिरफ्तारी किए जाने से आदिवासी समाज में आक्रोश व्याप्त हो गया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद युवा मोर्चा के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा निर्दोष लोगों को प्रताड़ित नहीं किए जाने की मांग की।
युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष शुभम उइके ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक जुलाई को हुई आगजनी की घटना निंदनीय है और इससे आम लोगों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में दो जुलाई को भाजपा नेता एवं बालाघाट जनपद पंचायत के सभापति भुवनेश्वर रजक, ग्राम पंचायत परतापुर के सरपंच राजेश सरिसाम सहित अन्य लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर पूछताछ की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के कई दिन बाद अब अचानक आदिवासी समाज के नौ लोगों को, जो अपने खेतों में खेती-किसानी का कार्य कर रहे थे, वहां से उठाकर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। उनका कहना है कि ये लोग न तो फरार थे और न ही पुलिस से बच रहे थे, बल्कि अपने गांवों में ही सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रारंभ में पुलिस द्वारा 8 से 9 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब इस मामले में 32 लोगों पर कार्रवाई की बात सामने आ रही है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों को सीधे खेतों से पकड़ा जा रहा है, जबकि कुछ को फोन कर थाने बुलाया जा रहा है।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक 55 वर्षीय व्यक्ति और उसके बेटे को भी आरोपी बनाया गया है। उनका कहना है कि किसी भी पिता-पुत्र द्वारा मिलकर करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना में आगजनी करना सामान्य बात नहीं है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान ग्राम पंचायत परतापुर के सरपंच की पत्नी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष विवेचना, निर्दोष लोगों के विरुद्ध कार्रवाई पर रोक तथा पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच की मांग की।
वहीं, लामता पुलिस का कहना है कि मामले में की जा रही सभी गिरफ्तारियां वैधानिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना के तहत की जा रही हैं तथा जांच निष्पक्ष रूप से जारी है।

