वर्दीधारी पत्नी को रास नहीं आ रहा पति का रहन-सहन मांगा तलाक

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भोपाल। रिश्ते त्याग और भरोसे की नींव पर टिकते हैं, लेकिन जब सफलता ‘अहंकार’ का लिबास पहन ले, तो वही नींव दरकने लगती है। भोपाल से आई यह कहानी बताती है कि कैसे एक पति की तपस्या से बनी पहचान, पत्नी की वर्दी के आगे बौनी पड़ गई और विवाह अदालत की चौखट तक जा पहुंचा।
पुजारी पति, सब-इंस्पेक्टर पत्नी और टूटा सम्मान
भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक अनोखा लेकिन दर्दनाक मामला चल रहा है। सब-इंस्पेक्टर बनी पत्नी ने अपने पति से तलाक की अर्जी इसलिए दी है क्योंकि उसे पति का पारंपरिक पहनावा-धोती-कुर्ता और शिखा और उसका पुजारी होना ‘उसके रुतबे के अनुकूल’ नहीं लगता। काउंसलिंग में उसने यहां तक कह दिया कि पति की हैसियत अब उसके साथ चलने लायक नहीं रही।
अनपढ़ पत्नी को पढ़ाना पड़ रहा भारी
पीड़ित बताता है कि छह साल पहले शादी के समय पत्नी बेरोजगार थी। उसने पुरोहिताई से होने वाली सीमित आमदनी से बचत कर पत्नी की पढ़ाई, स्नातक डिग्री, कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का पूरा खर्च उठाया। उसका सपना था कि पत्नी आत्मनिर्भर बने और वह सपना सब-इंस्पेक्टर की वर्दी तक पहुंचा भी।
वर्दी मिली, रिश्ते की कीमत घटी
रोहित (परिवर्तिन नाम) का दर्द इस बात को लेकर है कि जिस मुकाम तक पत्नी को पहुंचाने में उसने अपनी सादगी और मेहनत झोंक दी, उसी पहचान को आज पत्नी शर्म का कारण मान रही है। उसका कहना है कि पद मिलने के बाद पत्नी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया, सम्मान की जगह तिरस्कार ने ले ली।
रिश्ते को बचाने की आखिरी कोशिश
छह साल का यह रिश्ता अब टूटने की कगार पर है। कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक हैसियत बदलने पर जीवनसाथी के प्रति दृष्टिकोण बदल जाना एक गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या बनती जा रही है। हालांकि पति अब भी रिश्ते को बचाना चाहता है, लेकिन पत्नी अपनी तलाक की मांग पर अड़ी हुई है।