भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामाजिक एकजुटता और परंपरा का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। राठौर समाज द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में जहां कई जोड़े विवाह बंधन में बंधे, वहीं ईंधन संकट के चलते भोजन व्यवस्था पूरी तरह पारंपरिक तरीके से लकड़ी की भट्टियों पर की गई।
एक मंच पर विवाह और परिचय सम्मेलन
बता दें यह आयोजन पंडित खुशिलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान परिसर (दशहरा मैदान,कलियासोत डेम क्षेत्र) में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना से हुई। इसके बाद सुबह 9 से 12 बजे तक परिचय सम्मेलन हुआ, जिसमें लगभग 250 युवक-युवतियों की भागीदारी रही। इसके बाद सामूहिक विवाह संस्कार किया गया। समारोह में नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया गया और सादगीपूर्ण विदाई भी आयोजित की गई।
गैस संकट का असर
वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर इरान से जुड़े हालातों के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की चर्चा के बीच आयोजकों ने बड़ा फैसला लिया। जिसमें गैस सिलेंडर की कमी को देखते हुए लकड़ी की पारंपरिक भट्टियों पर भोजन तैयार किया गया। बड़े स्तर पर सामूहिक खाना बिना किसी रुकावट के बनाया गया। इस कदम ने न सिर्फ आयोजन को सुचारु रखा, बल्कि पारंपरिक भारतीय रसोई की झलक भी पेश की।
इस कार्यक्रम की एक खास बात इसका पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रवैया रहा। प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार, कागज से बने डिस्पोजल का उपयोग, पानी के लिए स्टील और तांबे के बर्तन और डिजिटल निमंत्रण के जरिए कागज की बचत की गई। यह आयोजन ‘ग्रीन इवेंट’ का एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया।
दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सामूहिक विवाह के दौरान समाज को दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश भी दिया गया। जिसमें सादगीपूर्ण विवाह पर जोर, सामाजिक जिम्मेदारी और समानता का संदेश, बिना दिखावे और खर्च के विवाह को बढ़ावा दिया गया। वहीं आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।


