वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को इस बिल को 86-12 के प्रक्रियात्मक मतों से मंजूरी दी। अब यह विधेयक आगे की प्रक्रिया के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा।
इस प्रस्तावित कानून में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध और 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत भी उन देशों में शामिल है, जिन पर इस कानून का असर पड़ सकता है।
भारत समेत कई देशों को बनाया गया निशाना
प्रस्तावित बिल का उद्देश्य रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों का उल्लेख किया गया है।
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विधेयक में रूसी अधिकारियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। साथ ही, भविष्य में इन टैरिफ को हटाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के विवेक पर छोड़ने का प्रस्ताव भी शामिल है।
ट्रंप ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या इस बिल को जल्द पारित कराने के लिए अगस्त अवकाश से पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। इस पर ट्रंप ने कहा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस विधेयक में ईरान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान भी जोड़ा जाना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी इसी तरह के प्रावधान के पक्ष में थे।
ईरान पर भी टैरिफ लगाने की मांग
ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति को ईरान पर भी टैरिफ लगाने के व्यापक अधिकार मिलने चाहिए। हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसद इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे कदमों से आयात की लागत बढ़ सकती है और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है। इसी कारण विधेयक की आगे की प्रक्रिया में देरी की संभावना भी जताई जा रही है।
अब आगे क्या होगा?
सीनेट में प्रक्रियात्मक चरण पूरे होने के बाद यह विधेयक हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। निचला सदन सितंबर में दोबारा बैठक के दौरान इस पर विचार करेगा। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद ही यह बिल कानून का रूप ले सकेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। हाल के वर्षों में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 40 से 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
यदि यह कानून लागू होता है और भारत पर 100% टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है। विशेष रूप से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।
पहले भी लग चुके हैं अतिरिक्त टैरिफ
इससे पहले भी रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका भारत के खिलाफ सख्त रुख अपना चुका है। अगस्त 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यदि भविष्य में टैरिफ की दर 100% तक पहुंचती है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारतीय निर्यात पर और अधिक गंभीर हो सकता है।

