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रूस प्रतिबंध विधेयक: अमेरिका में आगे बढ़ा प्रस्ताव, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा; आज हाउस में वोट

वाशिंगटन। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को आगे बढ़ाने के पक्ष में 214-211 मतों से मतदान किया। अब इस विधेयक पर प्रतिनिधि सभा में अंतिम मतदान बुधवार, 16 सितंबर को होने की उम्मीद है। विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद उन्हें रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन समेत कई देश इसकी संभावित चपेट में आ सकते हैं।

214-211 वोट से मिली मंजूरी, दो डेमोक्रेट सांसदों ने दिया रिपब्लिकन का साथ

प्रतिनिधि सभा में विधेयक को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव के पक्ष में 214 और विरोध में 211 वोट पड़े। दो डेमोक्रेट सांसदों ने अपनी पार्टी से अलग जाकर रिपब्लिकन सदस्यों के साथ मतदान किया। इसके बाद अब विधेयक अंतिम मतदान के चरण में पहुंच गया है। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की व्यापक शक्ति देता है।

सीनेट पहले ही कर चुका है पारित

यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से अगस्त में 86-11 मतों से पारित हो चुका है। हालांकि, अमेरिकी कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी और इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इसलिए फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है, बल्कि विधेयक के कानून बनने की स्थिति में ऐसी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

भारत समेत 10 देशों का नाम प्रस्तावित

प्रतिनिधि सभा में पेश एक संशोधन में उन देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव है, जिन्हें रूस से तेल खरीद के आधार पर संभावित 100 प्रतिशत तक टैरिफ के दायरे में रखा जा सकता है। इनमें भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल हैं।

विधेयक का मकसद क्या है

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। इसमें रूस की प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूसी तेल और गैस से होने वाली आय यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण में मदद करती है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। यदि विधेयक कानून बनता है और ट्रंप प्रशासन इसमें उपलब्ध अधिकारों का इस्तेमाल करता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, टैरिफ की वास्तविक दर, उसका समय और किन देशों पर उसे लागू किया जाएगा, यह आगे के अमेरिकी प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा।

अब नजर प्रतिनिधि सभा के अंतिम वोट पर

मंगलवार को प्रक्रियात्मक बाधा पार करने के बाद अब सबसे अहम पड़ाव प्रतिनिधि सभा का अंतिम मतदान है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के अगले चरण में पहुंचता है या नहीं। अगर प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलती है, तो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह कानून का रूप लेगा।

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