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 अमेरिका ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर किए हमले

ईरान ने अमेरिकी बेस पर जवाबी कार्रवाई का किया दावा

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हवाई और नौसैनिक हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई तेल टैंकर एम/टी किकु पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई।

CENTCOM के अनुसार, निशाना बनाए गए ठिकानों का इस्तेमाल ड्रोन संचालन, मिसाइल लॉन्चिंग, तटीय निगरानी और समुद्री सुरक्षा गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया है।

दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों में किसी बड़े नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

तेल टैंकर पर हमले से बढ़ा विवाद

रॉयटर्स के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। हमले में जहाज के कंट्रोल रूम को नुकसान पहुंचा, लेकिन चालक दल सुरक्षित रहा और जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।

पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट

1. अमेरिका का बड़ा हवाई अभियान
अमेरिका ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन ठिकानों, तटीय रडार और सैन्य प्रतिष्ठानों पर करीब एक घंटे तक हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।

2. ईरान का पलटवार
ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

3. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी चिंता
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, तेल टैंकर पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन तेल रिसाव की कोई सूचना नहीं मिली।

4. वैश्विक बाजार पर असर की आशंका
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

बढ़ सकता है क्षेत्रीय संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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