वॉशिंगटन: अमेरिका में डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका से बाहर डीजल भेजने पर रोक लगाने के बारे में सोचा जा रहा है। हालांकि, अभी इस पर कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है और सरकार के अंदर भी इसको लेकर अलग-अलग राय है।
बता दें, अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं। रूस और मिडिल ईस्ट से सप्लाई में दिक्कत के चलते पूरी दुनिया में डीजल का मार्केट पहले से ही टाइट है, ऐसे में अगर अमेरिका ने एक्सपोर्ट रोका तो कई देशों पर इसका असर पड़ेगा।
ट्रंप क्यों करना चाहते हैं डीजल Export कम?
ट्रंप का मकसद अमेरिका में ज्यादा डीजल उपलब्ध कराकर घरेलू कीमतों पर दबाव कम करना है। उन्होंने 27 सितंबर को एक बार फिर कहा कि इस विकल्प को बहुत गंभीरता से देखा जा रहा है और इसे लागू किया जा सकता है।
हालांकि, अमेरिका के Energy Secretary Chris Wright इस कदम को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि Export रोकने से अमेरिकी Refinery Production प्रभावित हो सकता है और Gasoline तथा Jet Fuel की कीमतों पर उल्टा असर पड़ सकता है।
दुनिया में क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
अमेरिका Global Diesel Market का बड़ा Supplier है। इसलिए अगर वहां से Export अचानक कम या बंद होता है तो पहले से तंग बाजार में सप्लाई और घट सकती है।
इसका असर खास तौर पर उन देशों पर ज्यादा हो सकता है जो अमेरिकी Fuel Supply पर निर्भर हैं। Diesel महंगा होने से Truck Transportation, Shipping, Agriculture और Industries की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर आखिर में खाने-पीने के सामान और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों तक पहुंच सकता है। Analysts ने भी चेतावनी दी है कि Export Ban से Global Fuel Market में परेशानी बढ़ सकती है।
भारत के लिए बन सकता है बड़ा मौका
भारत के लिए इस फैसले के दो पहलू हैं। भारत के पास बड़ी Refining Capacity है और वह Diesel का Net Exporter भी है। अगर अमेरिका की सप्लाई कम होती है तो Europe और दूसरे बाजार वैकल्पिक सप्लायर तलाश सकते हैं। ऐसे में भारतीय Refiners के लिए Diesel Export की मांग और Refining Margins बढ़ने का मौका बन सकता है।
यानी भारत से Petroleum Products का Export बढ़ सकता है और भारतीय Refining Companies को International Market में बेहतर कीमत मिल सकती है।
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लेकिन भारत के लिए खतरा भी कम नहीं
दूसरी तरफ, अगर इस पूरे घटनाक्रम के कारण Crude Oil और Fuel Prices ज्यादा बढ़ते हैं तो भारत के Import Bill पर दबाव बढ़ सकता है। इससे Trade Deficit और रुपये पर भी असर पड़ने का खतरा रहेगा।
इसके अलावा विदेशी बाजार में ज्यादा कीमत मिलने पर भारतीय कंपनियों के लिए Export ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में पर्याप्त Diesel Supply बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

