नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शन के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत के नाम पर उनके प्रतिनिधिमंडल का सिर्फ समय बर्बाद किया गया। उन्होंने दावा किया कि सरकार से मुलाकात के दौरान उनके प्रतिनिधियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर लगभग नजरबंद जैसी स्थिति में रखा गया।
अभिजीत दीपके ने साफ शब्दों में कहा कि अब उनका प्रतिनिधिमंडल सरकार से बातचीत के लिए कहीं नहीं जाएगा। यदि सरकार समाधान चाहती है तो उसे खुद जंतर-मंतर आकर आंदोलनकारियों से संवाद करना होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर है, इसलिए अब किसी भी तरह का समझौता बंद कमरे में नहीं बल्कि खुले मंच पर होना चाहिए।
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को विपक्षी दलों का समर्थन भी लगातार मिल रहा है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले आंदोलन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका समर्थन जताया। नेताओं ने सरकार से बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने की अपील भी की।
इसी बीच आंदोलन से जुड़ी एक अहम कानूनी कार्रवाई भी सामने आई। दिल्ली हाईकोर्ट ने गीतांजलि अंगमो की याचिका पर सुनवाई करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद मेदांता अस्पताल की दो एंबुलेंस उन्हें लेने पहुंच गईं। इस घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन और अधिक राजनीतिक एवं कानूनी चर्चा का केंद्र बन गया है।

