ढाका: बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा फैक्ट्रियों के मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई जगह हिंसा हुई। मीरपुर इलाके में मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं। इस दौरान पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंके गए और एक पुलिस गाड़ी में आग भी लगा दी गई। गाजीपुर में प्रदर्शनकारियों ने हाईवे जाम कर पुलिस चौकी फूंक दी। वहीं, अशुलिया इलाके में कम से कम 30 फैक्ट्रियां बंद रहीं।
मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30 हजार टका (करीब 23 हजार रुपए) किया जाए।
पुलिस ने लाठीचार्ज किया
रविवार सुबह ढाका के मीरपुर-10 चौराहे पर मजदूर इकट्ठा हुए। इस दौरान उन्होंने सड़कें जाम कर दी। इसके चलते मजदूरों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई।
पुलिस के मुताबिक, कुछ मजदूरों ने पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंके। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया। दोपहर करीब 12 बजे मीरपुर-11 मेट्रो स्टेशन के नीचे खड़ी एक पुलिस गाड़ी में भी आग लगा दी गई।
मीरपुर-10 मेट्रो स्टेशन का गेट भी बंद करना पड़ा। शनिवार को भी मजदूरों ने इसी इलाके में करीब चार घंटे तक सड़कें जाम रखी थीं।
हालात बिगड़ने पर फैक्ट्री प्रबंधन ने छुट्टी दी
ढाका के पास अशुलिया के औद्योगिक इलाके में भी शनिवार को मजदूरों ने प्रदर्शन किया। कई फैक्ट्रियों में काम बंद कर दिया गया। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ भी हुई।
हालात बिगड़ने पर फैक्ट्री प्रबंधन ने छुट्टी घोषित कर दी। अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में कम से कम 30 फैक्ट्रियां बंद रहीं।
सरकार ने छह सदस्यों वाला वेतन बोर्ड बनाया
प्रदर्शन के बीच बांग्लादेश सरकार ने रविवार को छह सदस्यों वाला वेतन बोर्ड बनाया है। इसका काम कपड़ा फैक्ट्रियों के मजदूरों की नई न्यूनतम सैलरी तय करना है।
श्रम मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने बताया कि बोर्ड जल्द से जल्द नई सैलरी तय करेगा। इसमें फैक्ट्री मालिकों, मजदूर संगठनों और एक स्वतंत्र प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। सरकार ने मजदूरों से सड़कें खाली कर काम पर लौटने की अपील की है।
महंगाई के कारण मजदूरों की परेशानी बढ़ी
बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों के मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन दिसंबर 2023 में करीब 9,600 रुपए तय किया गया था। मजदूरों का कहना है कि ओवरटाइम जोड़ने के बाद भी उन्हें करीब 14000 से 15000 हजार रुपए ही मिल पाते हैं, जो घर चलाने के लिए काफी नहीं हैं।
उनके मुताबिक, कुछ साल पहले जिस मकान का किराया करीब करीब 2000 रुपए था, वह अब बढ़कर 6000 रुपए तक पहुंच गया है। खाने-पीने, इलाज और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी बढ़ा है।
इसी वजह से मजदूर न्यूनतम वेतन 30 हजार टका करने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने वेतन बोर्ड तो बना दिया है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि सैलरी कितनी बढ़ेगी और नई दरें कब से लागू होंगी।
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बांग्लादेश में 40 लाख से ज्यादा कपड़ा मजदूर
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के मुताबिक, देश में करीब 4 हजार रजिस्टर्ड कपड़ा फैक्ट्रियां हैं। इनमें 40 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं।
चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया में सबसे ज्यादा कपड़े निर्यात करने वाला दूसरा देश है।बांग्लादेश के कपड़े 150 से ज्यादा देशों में बेचे जाते हैं। BGMEA के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश ने करीब 3.68 लाख करोड़ रुपए के कपड़े दूसरे देशों को बेचे।

