मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार दूसरे महीने भी जारी है। अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs ने भारतीय इक्विटी बाजार से 34 हजार 843 करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। इससे बाजार में विदेशी निवेश को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, दुनिया भर में बढ़ती ब्याज दरें और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया है। अक्टूबर में हुई इस भारी निकासी के साथ भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पूंजी बाहर जाने का सिलसिला लगातार दूसरे महीने जारी रहा।
हालांकि, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते के दौरान विदेशी निवेशकों ने रुख बदलते हुए बाजार में 6,300 करोड़ का नेट यानी शुद्ध निवेश किया, जबकि इससे पिछले हफ्ते में उन्होंने 2,700 करोड़ की बिकवाली की थी।
चार कारोबारी सेशन में से तीन में FPIs नेट खरीदार रहे
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आए सुधार से बाजार का शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट तो बेहतर हुआ है, लेकिन बाजार जानकारों का कहना है कि सिर्फ एक हफ्ते की खरीदारी को ट्रेंड में स्थायी बदलाव नहीं माना जा सकता।
कैश मार्केट में 30 अक्टूबर को खत्म हुए आखिरी चार कारोबारी सेशन में से तीन में FPIs नेट खरीदार रहे। इससे भारतीय शेयरों को लेकर विदेशी निवेशकों के नजरिए में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
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बिकवाली और खरीदारी के पीछे के 5 प्रमुख कारण
- कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दाम भारत में महंगाई और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और यूएस फेड: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड की दरों के चलते ग्लोबल कैपिटल वहां शिफ्ट हो रही है। हालांकि, यूएस फेड के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले से थोड़ा सहारा मिला।
- आकर्षक वैल्युएशन: बिकवाली के कारण भारतीय लार्ज-कैप शेयरों के दाम आकर्षक स्तर पर आ गए हैं।
- घरेलू आर्थिक ग्रोथ: भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ के संकेतों ने विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट में पॉजिटिव बदलाव किया।
- ग्लोबल AI ट्रेड में सुस्ती: ग्लोबल लेवल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े ट्रेड्स में आई सुस्ती ने भी विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो एलोकेशन को प्रभावित किया।

