भोपाल में 11वें अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का आयोजन: वन, वनोपज और संस्कृति का महाकुंभ

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वन, वनोपज और जनजीवन के उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। 11वें अंतर्राष्ट्रीय वन मेला आगामी 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान, जहांगीराबाद में आयोजित किया जाएगा। यह मेला न केवल प्रदेशवासियों बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।

अनूठा आयोजन, देशभर को रहता है इंतजार

वन मेला अपने आप में एक विशिष्ट और बहुआयामी आयोजन है, जहां वन आधारित आजीविका, पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक अनुसंधान और व्यापारिक संभावनाओं का संगम देखने को मिलता है। हर वर्ष इस मेले का इंतजार संग्राहकों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं को बेसब्री से रहता है।

उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

यह समारोह 17 दिसंबर सायंकाल 5 बजे से आयोजित किया जाएगा। जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में संपन्न किया जाएगा। 
इस अवसर पर वन, पर्यावरण और जनजातीय विकास से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ एवं देशभर से आए अतिथि भी शामिल होंगे, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ेगी।

मेले की थीम: समृद्ध वन, खुशहाल जन

इस साल मेले की थीम “समृद्ध वन, खुशहाल जन” रखी गई है, जो वन संरक्षण के साथ-साथ वन पर निर्भर समुदायों की आजीविका और समृद्धि के संदेश को मजबूती से प्रस्तुत करती है।

संवाद और अवसरों का व्यापक मंच

यह अंतर्राष्ट्रीय वन मेला लघु वनोपज, औषधीय पौधों और वन आधारित उद्योगों से जुड़ी गतिविधियों, उत्पादों और संभावनाओं को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है। यहां संग्राहक, उत्पादक, व्यापारी, उद्यमी, वैज्ञानिक, प्रशासक और नीति निर्धारक आपस में संवाद कर अनुभव साझा करेंगे और नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।

350 स्टॉल्स में दिखेगा वन उत्पादों का वैभव

वन मेले में इस बार कुल 350 स्टॉल्स लगाए जा रहे हैं, जिनमें-

  • 10 शासकीय स्टॉल
  • 24 अन्य राज्यों के स्टॉल
  • 16 प्रदर्शनी स्टॉल
  • 136 प्राइवेट स्टॉल
  • 26 फूड स्टॉल, जिनमें विशेष रूप से
    • वन विभाग के 3 स्टॉल
    • छिंदवाड़ा
    • अलीराजपुर (दाल पनिया)
    • बांधवगढ़ (गौंडी व्यंजन)
  • 50 ओपीडी स्टॉल (आयुर्वेदिक एवं औषधीय परामर्श)
  • 1 किड्स जोन (बच्चों के लिए विशेष आकर्षण)

वनोपज से लेकर पारंपरिक स्वाद तक

मेले में जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, पारंपरिक खाद्य उत्पादक एवं विक्रेता अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय करेंगे। यह मेला स्वास्थ्य, स्वाद और संस्कृति—तीनों का अनूठा अनुभव प्रदान करेगा।

वन संरक्षण और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

अंतर्राष्ट्रीय वन मेला न केवल वन संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए द्वार भी खोलता है। यह आयोजन मध्यप्रदेश को वन आधारित विकास मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।