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समाज सेवी अन्ना हजारे एक बार फिर से करेंगे अनशन किया ऐलान, साल 2011 में किए गए आंदोलन से हुए थे प्रसिद्ध

मुंबई। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर से सुर्खियों में हैं, उन्होंने सरकार के खिलाफ पुनः अनशन करने का ऐलान किया है। नए वर्ष के पहले महीने की 30 तारीख से वे फिर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन करने जा रहे हैं। उनका मुद्दा वही है लोकापाल एक्ट को महाराष्ट्र में लागू कराने का। उल्लेखनीय है कि सूचना का अधिकार और लोकापाल की मांग को लेकर पूर्व में भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के व्यापक आमरण अनशन कर चुके हैं और देश को सूचना का अधिकार और लोकापाल एक्ट दिलाने में कामयाबी हासिल की थी।
आखरी होगा यह आंदोलन
वयोवृद्ध समाज सेवी अन्ना हजारे ने बताया कि यह आंदोलन उनका अंतिम होगा। इससे लोगों के बीच उत्सुकता तो राजनीतिक हलके में भारी चिंता बढ़ गई हैं कि आखिर इतने वर्षों बाद उन्हें फिर से अनशन पर बैठने की जरूरत क्यों पड़ी? बतादें के दिल्ली के जंतर-मंतर में किए गए वर्ष 2011 में आमरण अनशन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पहलीवार भ्रष्टाचार को लेकर भारी संख्या में जनसमूह जुड़ा था। जिसके बाद आप पार्टी के शक्ल में देश को एक नई राजनीति पार्टी मिली और अरविंद्र केजरीवाल जैसे नेता अस्तित्व में आ सके।
आखिर क्यो लागू नहीं हो रहा लोकापाल ?
समाजसेवी अन्ना हजारे का कहना है कि लोकापाल कानून देश भर में भ्रष्टाचार रोकने के लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने इसे पास तो कर दिया, राष्ट्रपति ने मंजूरी भी दे दी, लेकिन धरातल पर यह कानून अभी तक लागू किया जा सका है, जो कि चिंता का विषय है। इसको लेकर अन्ना हजारे का दावा है कि उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री को सात बार लेटर लिखा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब तक नहीं मिला।
लोकापाल एक्ट को लेकर जनता में भी बढ़ रहा गुस्सा
लोकापाल एक्ट भ्रष्टाचार रोकने वाला कानून है। यह सरकार से लेकर प्रशासन तक, हर स्तर पर जवाबदेही तय करता है। कई नागरिक समूह और एक्टिविस्ट भी मानते हैं कि महाराष्ट्र में यह कानून लागू होना जरूरी है, क्योंकि कई बड़े घोटाले लगातार सामने आते रहे हैं। अन्ना हजारे के अनशन के एलान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है कि क्या सरकार इस बार झुकेगी? क्या लोकापाल एक्ट सच में लागू होगा? या फिर यह आंदोलन भी वादों में ही खत्म हो जाएगा?
अन्ना ने क्यों कहा आखिरी आंदोलन?
2011 में जब अन्ना हजारे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे थे, तब पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा हो गया था। देश के कौने-कौने से लाखों की तादात में लोग सड़कों पर उतर आए थे। इंडिया अगेंस्ट करप्शन नामक इस आंदोलन ने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया था। तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार के लिए दिन में तारे नजर आ गए थे। इस आंदोलन में मेधा पाटकर, किरण वेदी, सालिया इल्मी, आशुतोष, कुमार विश्वास जैसे लोग इस आंदोलन का हिस्सा बने। अन्ना हजारे अब कह रहे हैं कि यह आंदोलन उनका आखिरी संघर्ष होगा। इस बात ने उनके समर्थकों, एक्टिविस्ट्स और आम जनता को भी चिंतित कर दिया है।

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