नई दिल्ली। चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह एक विकेंद्रीकृत व्यवस्था है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़े वैधानिक कार्य संबंधित फील्ड अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में ही आते हैं। मुख्यालय में तैनात कोई अन्य अधिकारी उनकी जगह ये काम नहीं कर सकता।
यह सफाई ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग की डिजिटल व्यवस्था और मतदाता सूची के डेटा तक पहुंच को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मतदाता सूची के डेटाबेस के कथित केंद्रीकरण पर चिंता जताए जाने का उल्लेख किया गया था।
फील्ड अफसरों के पास अधिकार
आयोग के अधिकारियों के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ECINet पर अपनी-अपनी जिम्मेदारियां यूनिक आईडी और पासवर्ड के जरिए निभाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन वैधानिक कार्यों को कोई दूसरा अधिकारी नहीं कर सकता।
साइबर सुरक्षा केंद्रीय स्तर पर
आयोग ने बताया कि ECINet की साइबर सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय स्तर पर रखी गई है। इसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना है। आयोग के मुताबिक, इस साल विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन ECINet पर करीब 68 लाख साइबर हमलों के प्रयास किए गए थे।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला
ECINet पर सवाल उस समय भी उठे, जब गोवा में SIR के दौरान 97 मतदाताओं को ERO ने पात्र पाया। रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर में उनके नाम दोबारा बहाल करने के लिए जरूरी रोलबैक विकल्प उपलब्ध नहीं था। इसी मामले के बाद डिजिटल सिस्टम में फील्ड अधिकारियों की पहुंच और उपलब्ध विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हुई।
फॉर्म-6 पर भी आयोग की सफाई
SIR के दौरान नए मतदाताओं से फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा लिए जाने पर भी आयोग ने सफाई दी। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रावधान 24 जून 2025 के बिहार SIR आदेश का हिस्सा था और बाद के SIR आदेशों में भी इसे शामिल किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि उसके साथ अतिरिक्त घोषणा मांगी गई थी।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर आयोग का पक्ष
चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की ओर से SIR तथा डिजिटल सिस्टम को लेकर सवाल उठाए जाने की रिपोर्टों पर आयोग ने कहा कि दोनों आयुक्तों के सुझाव और टिप्पणियां मुख्य रूप से मसौदा चरण से संबंधित थीं। आयोग के मुताबिक, सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वैधता बरकरार रखी थी। अदालत ने कहा था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) से जुड़ी है। कोर्ट ने यह भी माना था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए पात्रता से संबंधित सीमित नागरिकता जांच चुनाव आयोग कर सकता है।

