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2008 अहमदाबाद ब्लास्ट: सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी की फांसी पर लगाई रोक

नई दिल्ली: 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी। बरेलवी उन 38 दोषियों में शामिल है, जिन्हें इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ बरेलवी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने गुजरात हाईकोर्ट के जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से फिलहाल बरेलवी की सजा पर अमल रुक गया है।

हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी

गुजरात हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी। इसके अलावा 11 दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई थी। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फरवरी 2022 के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर यह फैसला सुनाया था।

विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी, जबकि 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।

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26 जुलाई 2008 को हुए थे सीरियल ब्लास्ट

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में करीब 70 मिनट के भीतर सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। कुछ धमाके उन अस्पतालों के आसपास भी हुए थे, जहां घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया था।

इस मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था। अहमदाबाद और सूरत से जुड़े कुल 35 पुलिस मामलों को एक साथ जोड़ा गया था। विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अब बरेलवी की याचिका पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। अदालत के अगले आदेशों के बाद उसकी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे सुनवाई होगी।

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