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यात्रियों की परेशानी और विमानन उद्योग में हड़कंप

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े ऑपरेशनल संकट से गुजर रही है। बीते तीन दिनों में कंपनी को 550 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसे भारतीय एविएशन इतिहास का सबसे बड़ा ‘फ्लाइट ब्लैकआउट कहा जा रहा है।
इंडिगो का ऑपरेशनल संकट और उड़ानों की बड़े पैमाने पर रद्दीकरण
बुधवार और गुरुवार को 550 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हुईं और शुक्रवार तक यह आंकड़ा 300 के करीब पहुंच गया। डीजीसीए और सिविल एविएशन मंत्रालय ने इसे अत्यंत गंभीर मुद्दा मानते हुए एयरलाइन से लगातार स्पष्टीकरण मांगा है। एयरलाइन ने स्वीकार किया है कि एफडीटीएल नियमों के दूसरे चरण के लागू होने के बाद उसकी प्लानिंग में बड़ी कमी रह गई, जिसका असर सीधे शेड्यूल पर पड़ा।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी और समस्या की गंभीरता
इंडिगो वर्तमान में भारत के 60þ घरेलू हवाई ट्रैफिक का संचालन अकेले संभालती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ नियमों का परिणाम है या प्रबंधन की भारी चूक? कंपनी का कहना है कि 10 फरवरी 2026 से पहले स्थिति सामान्य होना मुश्किल है, जिससे संकट और गहरा सकता है।
पायलटों की कमी बनी मुख्य वजह
एफडीटीएल नियमों के बाद पायलटों की आवश्यकता अचानक बढ़ गई, लेकिन नियोजित भर्ती नहीं की गई। इंडिगो के आंकड़ों के अनुसार-
.उपलब्ध कैप्टनः 2357 आवश्यकताः 2422
.उपलब्ध फर्स्ट ऑफिसरः 2194 आवश्यकताः 2153
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का आरोप है कि एयरलाइन ने दो साल की तैयारी अवधि होने के बावजूद हायरिंग फ्रीज लागू रखा।
dgca की सख्ती और यात्रियों पर असर
डीजीसीए ने आदेश जारी किया है कि इंडिगो
हर 15 दिन में प्रोग्रेस रिपोर्ट दे
ग्राउंड स्टाफ और क्रू बढ़ाए
नया ट्रेनिंग मॉडल लागू करे
उड़ान शेड्यूल दोबारा तैयार करे
एयरलाइन ने चेतावनी दी है कि 8 दिसंबर तक और उड़ानें रद्द होंगी, जिससे किराए बढ़ने की भी आशंका है। कई शहरों में किराए पहले ही दोगुने हो चुके हैं।
यह संकट सिर्फ तकनीकी नहीं, प्रबंधन विफलता का संकेत
इंडिगो का यह संकट भारतीय एविएशन प्लानिंग और मानव संसाधन प्रबंधन में बड़ी चूक को उजागर करता है। आने वाले 10-12 दिनों में यात्रियों की समस्याएँ और बढ़ सकती हैं, और स्थिति पूरी तरह राहत वाली नहीं दिखती।

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