पेशी पर पहुंचे पति से मिलने आई पत्नी ने दिया बच्चे को जन्म, जिला न्यायलय परिसर में गूंजी किलकारी

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दमोह। न्याय की चौखट पर उस वक्त जीवन की नई दस्तक सुनाई दी, जब जिला न्यायालय परिसर में एक गर्भवती महिला ने शिशु को जन्म दिया। पेशी पर आए पति से मिलने आई पत्नी की पीड़ा किलकारी में बदली और अदालत का माहौल भावनाओं से भर उठा।
जिला न्यायालय परिसर उस समय मानवीय संवेदनाओं का साक्षी बन गया, जब पेशी पर पहुंचे पति से मुलाकात के लिए आई एक गर्भवती महिला ने अदालत परिसर में ही बच्चे को जन्म दे दिया। अचानक गूंजी नवजात की किलकारी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जानकारी के अनुसार महिला का नाम सपना वंशकार है। वह अपने पति से मिलने दमोह जिला न्यायालय आई थी, जो किसी मामले में जेल में बंद हैं। सपना गर्भावस्था के अंतिम चरण में थी, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि उसी दिन उसे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो जाएगी। जैसे ही उसे तेज दर्द उठा, न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वहां मौजूद अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों ने बिना समय गंवाए मदद का हाथ बढ़ाया। अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव के अनुसार, किसी ने पानी और कपड़ों की व्यवस्था की, तो किसी ने तुरंत चिकित्सा सहायता बुलाने में सहयोग किया। कुछ देर के लिए न्यायालय का नियमित कामकाज भी थम सा गया और हर चेहरा मां और बच्चे की सलामती की दुआ करता नजर आया।
थोड़ी ही देर में सपना वंशकार ने सुरक्षित रूप से शिशु को जन्म दिया। नवजात के रोने की आवाज जैसे ही परिसर में गूंजी, वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलकने लगी। यह दृश्य सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया।
परिजनों ने कहा बेटे को वकील बनाएंगे
महिला की जेठानी रजनी ने बताया कि सपना का यह चौथा बच्चा है। अब परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। रजनी ने भावुक स्वर में कहा कि परिवार इस बच्चे को ईश्वर का विशेष आशीर्वाद मान रहा है। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी बताया कि मां की इच्छा है कि यह बच्चा बड़ा होकर वकील बने, क्योंकि इसने अपने जीवन की शुरुआत ही न्यायालय परिसर से की है।
मां और बच्चा सुरक्षित
इस पूरी घटना के प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ता इसे अपने वकालती जीवन का कभी न भूलने वाला अनुभव है। परिजनों ने बताया कि मां और नवजात दोनों की हालत अब स्थिर है। यह घटना न केवल वहां मौजूद लोगों के लिए यादगार बन गई, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि जीवन हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का रास्ता खोज ही लेता है।