पनडुब्बी में सफर करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू, INS वाघषीर में की समुद्र के नीचे यात्रा

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कारवाड़ (कर्नाटक)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय नौसेना के इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ा है। उन्होंने रविवार को कर्नाटक स्थित कारवाड़ नेवल बेस से अत्याधुनिक पनडुब्बी INS वाघषीर में समुद्र के भीतर यात्रा की। इस विशेष अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद रहे। इसके पहले यह अवसर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को प्राप्त हुआ था।

नौसेना की वर्दी में राष्ट्रपति

इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू नौसेना की वर्दी में दिखी। उन्होंने पनडुब्बी के भीतर पहुंचकर अधिकारियों और नाविकों से बातचीत की। बता दें यह उनकी पहली कलवरी क्लास सबमरीन यात्रा रही।

राष्ट्रपति क साहसिक रिकॉर्ड

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले भी भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों में उड़ान भरकर इतिहास रच चुकी हैं। उन्होंने 29 अक्टूबर 2024 को राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी थी और  2023 में सुखोई-30 एमकेआई में भी वे सवार हो चुकी हैं। इस तरह वे थल, जल और नभ तीनों क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं का प्रत्यक्ष अनुभव लेने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।

डॉ. कलाम ने की थी पहली पनडुब्बी यात्रा

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम 13 फरवरी 2006 को विशाखापट्टनम से ईस्टर्न नेवल कमांड की पनडुब्बी में बंगाल की खाड़ी के भीतर गए थे। उस समय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश उनके साथ थे। यात्रा के बाद डॉ. कलाम ने इसे भारतीय नौसेना की “साइलेंट स्ट्रेंथ” को समझने का अनूठा अनुभव बताया था।

समुद्र के भीतर भारत की घातक ताकत

INS वाघषीर को इसी वर्ष जनवरी में औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। बता दे INS वाघषीर एक डीज़ल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है। जिसे प्रोजेक्ट-75 के तहत मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस पनडुब्बी को साइलेंट किलर’ के नाम से भी जाना जाता है।

INS वाघषीर की प्रमुख क्षमताएं

  • 4 शक्तिशाली डीजल इंजन और 360 हाई-कैपेसिटी बैटरी सेल
  • सतह पर अधिकतम गति: 20 किमी/घंटा
  • पानी के भीतर रफ्तार: 37 किमी/घंटा
  • 50 दिनों तक लगातार समुद्र में तैनाती की क्षमता
  • अधिकतम 350 फीट गहराई तक संचालन
  • 8 अधिकारी और 35 नाविकों की तैनाती