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मानवाधिकार आयोग का मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस, दो हफ्ते में जवाब तलब

इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर घटना की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
एनएचआरसी का संज्ञान
आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि स्थानीय लोग पहले ही दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी लापरवाही के कारण यह गंभीर घटना घटी।
मानवाधिकार उल्लंघन
एनएचआरसी ने माना कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी में विफलता पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने मुख्य सचिव से पूरे मामले की जवाबदेही तय करने को कहा है।
सरकार और नगर निगम पर सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पाइपलाइन लीकेज से नाले का पानी सप्लाई लाइन में घुसा। इसके बावजूद समय पर सप्लाई बंद नहीं की गई, जिससे हालात बिगड़ते चले गए।
मुआवजे की घोषणा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है, लेकिन आयोग का कहना है कि केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई जरूरी है।

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