भोपाल। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के एक बयान ने देश की राजनीति और समाज दोनों को झकझोर दिया है। रेप जैसे जघन्य अपराध को धर्म और ग्रंथों से जोड़ने की कोशिश ने न सिर्फ उनकी सोच पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि सत्ता की राजनीति किस हद तक संवेदनशीलता खो सकती है।
दरअसल, इंटरव्यू के दौरान कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने रेप जैसे गंभीर अपराध को लेकर जो तर्क दिए, उनके इस बयान ने व्यापक जन आक्रोश को जन्म दे दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ धर्मग्रंथों में अनुसूचित जाति की महिलाओं के साथ सहवास को पुण्य बताया गया है और इसके लिए ‘रुद्रयामल तंत्र’ नामक पुस्तक का हवाला दिया। हालांकि, जब उनसे इसका ठोस संदर्भ पूछा गया, तो वे कोई प्रमाण नहीं दे सके।
यहीं मामला नहीं रुका। बरैया ने यह भी कहा कि रेप कोई अकेला व्यक्ति नहीं करता, बल्कि चार-पांच लोग मिलकर करते हैं और उनके दिमाग में यह सोच रहती है कि उन्हें पुण्य मिलेगा। इस बयान को कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने खतरनाक बताया है, क्योंकि कानून में अपराध की जिम्मेदारी पूरी तरह व्यक्तिगत मानी जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज की बच्चियां आसान शिकार बनती हैं, यहां तक कि चार महीने की बच्चियों के साथ भी अपराध हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान अपराध को सामाजिक सोच का परिणाम बताकर अपराधियों की जिम्मेदारी को कमतर करते हैं, जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है।
यह पहला मौका नहीं है जब बरैया विवादों में आए हों। इससे पहले भी वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को लेकर टिप्पणी, अधिकारियों को धमकी और चुनाव प्रणाली पर अपमानजनक बयान देकर सुर्खियों में रह चुके हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि रेप कोई बहस का विषय नहीं, बल्कि जघन्य अपराध है और इसे किसी भी धर्म या जाति से जोड़ना पूरी तरह गलत है। इस बयान के बाद भी राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या नेताओं की जुबान पर अब सामाजिक जिम्मेदारी से ज्यादा राजनीतिक लाभ हावी हो गया है।
रेप पर विवादित बयान, राजनीति में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा


