सागर। प्रदेश में कानून व्यवस्था की चूलें हिलती नजर आ रही हैं। राजधानी भोपाल की सड़कों पर खौफ का पर्याय बने ’सिरफिरे’ की गिरफ्तारी के बीच सागर में एक नर्स की नृशंस हत्या ने कानून व्यवस्था दुरुस्त होने के दावों की कलई खोल दी है।
मध्य प्रदेश के दो प्रमुख शहरों से आई खबरें महिला सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। एक ओर जहां राजधानी भोपाल में राह चलती युवतियों पर प्राणघातक हमला करने वाले आरोपी को पकड़ने में पुलिस को पसीना आ गया, वहीं दूसरी ओर सागर जिले के शाहगढ़ में एक कर्तव्यनिष्ठ नर्स की दिनदहाड़े हत्या ने सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है।
पहला मामला, अस्पताल के पास मौत का तांडव
सागर जिले के शाहगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय मातम पसर गया, जब ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ’’दीपशिखा’’ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मूलतः जबलपुर की निवासी दीपशिखा जब बुधवार को अस्पताल के पास सड़क पार कर रही थीं, तभी घात लगाए बैठे हमलावर ने उन्हें निशाना बनाया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिवारी के अनुसार, वारदात इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद सहकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, लेकिन हत्या के कारणों का अब तक खुलासा नहीं हो सका है।
दूसरा मामला सनकी हमलावर पुलिस हिरासत में
राजधानी के अयोध्या नगर क्षेत्र में पिछले छह दिनों से दहशत का माहौल था। अपनी पत्नी से विवाद के बाद सागर से भागकर भोपाल आए एक सिरफिरे ने राह चलती युवतियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। पुलिस टीमों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वह तब पकड़ा गया, जब वह एक और वारदात को अंजाम देने की फिराक में था।
ये दोनों घटनाएं संकेतक हैं कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म होता जा रहा है। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों में यदि ’जीवन रक्षक’ ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।
प्रदेश की कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, सागर में नर्स की गोली मारकर हत्या


