पश्चिम बंगाल। विधानसभा चुनाव 2026 में मुकाबला जैसे-जैसे तेज हो रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के साथ-साथ संगठन भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर माइक्रो-आउटरीच कैंपेन शुरू किया है, जिसका फोकस सीधे मतदाताओं तक पहुंच बनाना और पब्लिक ओपिनियन को प्रभावित करना है।
1.75 लाख से ज्यादा ‘ड्राइंग रूम मीटिंग’
संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अब तक 250+ विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 1.75 लाख छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों को पारंपरिक रैली से अलग ड्राइंग रूम मीटिंग मॉडल कहा जा रहा है, जहां 4–5 स्वयंसेवकों की टीम घर-घर जाकर सीमित लोगों के साथ सीधा संवाद करती है। इस मॉडल का उद्देश्य व्यक्तिगत स्तर पर विश्वास बनाना, स्थानीय मुद्दों पर चर्चा और वोटिंग के लिए प्रेरित करना है।
बता दें RSS इस पूरे अभियान को सीधे चुनाव प्रचार नहीं मानता, बल्कि इसे ‘लोक मत परिष्कार’ यानी public opinion shaping exercise कहता है। इस अभियान के तहत लोगों से बिना डर और दबाव के वोट डालने की अपील, NOTA से दूर रहने का संदेश, 100% मतदान का लक्ष्य, मुद्दों पर आधारित पर्चे और चर्चा करना है।
किन मुद्दों पर फोकस?
- महिला सुरक्षा और ‘दुर्गा ब्रिगेड’ का वादा
- भ्रष्टाचार: घोटालों का नैरेटिव
- घुसपैठ और डेमोग्राफी बहस
डबल इंजन कैंपेन
यह अभियान सिर्फ ऑफलाइन नहीं है। बल्कि स्वयंसेवक लोगों के मोबाइल नंबर एकत्र कर रहे हैं, बाद में फॉलो-अप संपर्क बनाए रखते हैं और वॉट्सऐप और सोशल मीडिया के जरिए मैसेजिंग जारी रखते हैं। इससे एक तरह का हाइब्रिड कैंपेन मॉडल बन रहा है।
वहीं RSS कार्यकर्ता सिर्फ प्रचार नहीं कर रहे, बल्कि बूथ स्तर का फीडबैक इकट्ठा कर रहे हैं, संभावित हिंसा या गड़बड़ी की जानकारी दे रहे हैं और लोकल पॉलिटिकल एक्टिविटी पर नजर रख रहे हैं यह डेटा चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।


