लोकसभा में शायरी के साथ शशि थरूर का बजट पर हमला

दिल्ली। लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर का अंदाज एक बार फिर अलग नजर आया। उन्होंने शायरी का सहारा लेते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए और कहा कि बजट आम लोगों की जमीनी परेशानियों से कटा हुआ दिखाई देता है।

ग़ालिब के शेर से सरकार पर तंज

सदन में बोलते हुए थरूर ने मिर्ज़ा ग़ालिब का मशहूर शेर पढ़ा और कहा कि-  बड़े-बड़े दावे और आकर्षक नारे हकीकत नहीं बदलते। उनके मुताबिक विकसित भारत का सपना भाषणों या प्रतीकों से नहीं, बल्कि आखिरी व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने से पूरा होगा। वहीं शशि थरूर ने आरोप लगाया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बेरोजगारी, जीवन यापन की लागत और बढ़ती असमानता जैसे मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक की रोजमर्रा की जद्दोजहद बजट की प्राथमिकताओं में नजर नहीं आती।

कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च को लेकर सवाल

कांग्रेस सांसद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि- पिछले बजट में जिन बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए भारी भरकम राशि तय की गई थी, उसका बड़ा हिस्सा समय पर खर्च ही नहीं हो पाया। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि- यह नीतिगत शासन नहीं, बल्कि सुर्खियां बटोरने की रणनीति लगती है।

किसानों और ग्रामीण भारत को नजरअंदाज करने का आरोप

साथ ही थरूर ने कृषि क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के वादे पूरे नहीं हुए हैं और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि वर्षों से बिना बदलाव के बनी हुई है। उनके मुताबिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बजट में ठोस कदमों की कमी है।

 

 

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