दिल्ली। वैश्विक तनाव के दौर में नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट और यूक्रेन संकट पर बड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि- आधुनिक दुनिया में किसी भी बड़े विवाद का स्थायी समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही शांति का असली रास्ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह टिप्पणी फिनलैंड के साथ भारत की साझेदारी पर बात करते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही कानून के शासन, बातचीत और कूटनीतिक समाधान में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि दोनों देश वैश्विक संघर्षों के जल्द अंत और स्थायी शांति के लिए हर सकारात्मक प्रयास का समर्थन करते हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
इस बयान का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि इन दिनों ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष को छह दिन से ज्यादा हो चुके हैं और अब तक एक हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और नौसैनिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाया है।
बताया जा रहा है कि हमलों में ईरान के कई अहम सैन्य और सरकारी संस्थान भी प्रभावित हुए हैं। वहीं क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता बढ़ गई है।
वैश्विक संस्थानों में सुधार की जरूरत
पीएम मोदी ने इस मौके पर यह भी कहा कि- बदलती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार बेहद जरूरी है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि दुनिया को मिलकर हर प्रकार के आतंकवाद को जड़ से खत्म करना होगा।
भारत-फिनलैंड सहयोग को नई दिशा
प्रधानमंत्री ने भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ते सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर हाई-टेक सेक्टर तक पहुंच रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6G टेलीकॉम, क्लीन एनर्जी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे तकनीकी और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।
वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में पीएम मोदी का संदेश साफ है- युद्ध नहीं, संवाद और सहयोग ही स्थायी शांति का रास्ता बना सकते हैं।


