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LPG संकट पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, कहा- ‘युद्ध जैसे हालात में सरकार के फैसलों में दखल नहीं’

बेंगलुरु। देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर उठे संकट के बीच कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। होटल यूनियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि मौजूदा परिस्थितियां असाधारण हैं और ऐसे समय में सरकार के नीतिगत फैसलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि देश फिलहाल “युद्ध जैसे हालात” का सामना कर रहा है, और इस स्थिति में सरकार पर ही यह जिम्मेदारी है कि वह प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय ले। अदालत ने यह भी माना कि सरकार हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

यह याचिका कर्नाटक होटल यूनियन की ओर से दायर की गई थी, जिसमें एलपीजी की कमी का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गैस सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति के चलते होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अदालत से सरकार को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार लगातार बदलते हालात पर नजर बनाए हुए है और स्थिति से निपटने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

तुषार मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि एलपीजी आपूर्ति में आई कमी के पीछे कई ऐसे कारण हैं जो सरकार के सीधे नियंत्रण में नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि आम जनता को न्यूनतम परेशानी हो।

केंद्र सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि ऐसे समय में प्राथमिकता तय करना बेहद जरूरी होता है—चाहे वह घरेलू उपभोक्ता हों या व्यावसायिक प्रतिष्ठान। यह निर्णय सरकार का अधिकार क्षेत्र है और इसमें अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को मौजूदा संकट के बीच सरकार को मिली एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

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