भोपाल: केंद्र सरकार ने किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए संशोधित ‘एग्री वेलफेयर पोर्टल’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना और खेती-किसानी से जुड़ी हर सरकारी मदद व जानकारी सीधे उनके मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार हमेशा आम नागरिक और किसान के लिए मोबाइल पर लाइव रहनी चाहिए। तकनीक की असली सार्थकता तभी है जब वह सीधे खेत-खलिहान तक पहुँचे और किसान का जीवन आसान बनाए।
दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी मुक्ति
इस पोर्टल के जरिए अब किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी लेने या आवेदन करने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। यह पोर्टल मंत्रालय की सभी योजनाओं, सब्सिडी, नियमों और डिजिटल सेवाओं के लिए एक साझा प्रवेश-द्वार (सिंगल विंडो) का काम करेगा।
पोर्टल की मुख्य विशेषताएं
सब कुछ एक ही जगह: पीएम-किसान, एग्रीस्टैक, पीएम फसल बीमा योजना, खाद-बीज की उपलब्धता और मंडियों के भाव जैसी तमाम जानकारियां अब एक ही क्लिक पर मिलेंगी, जिससे समय और भागदौड़ की पूरी बचत होगी।
पारदर्शिता और डीबीटी: ऑनलाइन पात्रता जांच, सीधे आवेदन और सहायता राशि सीधे बैंक खाते में (DBT) पहुंचने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी।
धीमे इंटरनेट पर भी तेज संचालन: ग्रामीण इलाकों की इंटरनेट कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल को बेहद हल्का और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है, जो साधारण स्मार्टफोन और कमजोर नेटवर्क पर भी आसानी से काम करता है।
दिव्यांगजनों के लिए भी सुगम: आधुनिक सरकारी मानकों के तहत इसे ऐसा डिजाइन किया गया है कि दृष्टिबाधित और दिव्यांग किसान भी स्क्रीन-रीडर और सरल नेविगेशन के जरिए इसका पूरा लाभ उठा सकें।
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विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा
यह पोर्टल केवल किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप्स को भी एक ही मंच पर जोड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसकी भाषा और प्रक्रिया को इतना सरल रखा गया है कि कम पढ़े-लिखे छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से समझ सकें। किसानों को इस पोर्टल और डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल में माहिर बनाने के लिए देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से एक विशेष प्रशिक्षण अभियान भी चलाया जाएगा।

