भोपाल: फर्जी भारतीय पासपोर्ट का बड़ा खेल सामने आया है। बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने के मामले में एसटीएफ की जांच तेज हो गई है। अब तक एसटीएफ ने 100 से ज्यादा लोगों को चिन्हित किया है और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, विप्लव अधिकारी, जॉय चौधरी, प्रियान चौधरी, गया प्रसाद गौतम, नसीम अख्तर और गुलाब राय गौतम शामिल हैं।
जांच में पता चला है कि पिछले 5 साल में 70 से ज्यादा संदिग्ध भारतीय पासपोर्ट बनाए गए। इन पासपोर्ट पर 120 से ज्यादा बार विदेश यात्राएं की गई हैं। एसटीएफ अब ये पता लगा रही है कि इन पासपोर्ट पर जो लोग बाहर गए, उनमें से कितने वापस लौटे और कितने वहीं रह गए।
पुलिस ने पासपोर्ट ऑफिस से सभी का ट्रैवल रिकॉर्ड मांगा है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि इन पासपोर्ट का इस्तेमाल चीन, थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसी यात्राओं के लिए हुआ है। सवाल ये भी है कि क्या ये सिर्फ घूमने के लिए थे या विदेश में सेटल होने का जुगाड़।
50 से ज्यादा कर्मचारी-अधिकारी रडार पर
ये रैकेट अकेले नहीं चला। एसटीएफ की जांच में करीब 50 कर्मचारी-अधिकारी भी शक के घेरे में हैं। इनमें पुलिस वेरिफिकेशन करने वाले, पासपोर्ट शाखा के लोग और दस्तावेज बनाने में मदद करने वाले शामिल हैं।
जांच में ये भी देखा जा रहा है कि फर्जी कागज कैसे बने, कौन गवाह बना, मठों में इन लोगों को किसने ठहराया और वेरिफिकेशन में नियमों का पालन हुआ या नहीं। मतलब कागज बनने से लेकर पासपोर्ट हाथ में आने तक, हर स्टेज पर किसकी क्या भूमिका थी, सब खंगाला जा रहा है।
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भारतीय पासपोर्ट क्यों टारगेट?
पूछताछ में रियाल चौधरी ने बताया कि भारतीय पासपोर्ट की वैल्यू ज्यादा है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के मुताबिक भारतीय पासपोर्ट 75वें नंबर पर है और इस पर 56 देशों में बिना पहले वीजा या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है। इसी वजह से इस पासपोर्ट को टारगेट किया गया।

