बालाघाट: भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब महिला सम्मान, संगठन की जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर सवालों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। जिसे लेकर सोशल मीडिया में जमकर पोस्ट की जा रही है। भाजपा युवा मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अमन गांधी पर घर की महिलाओं के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों को लेकर विवाद गहराया हुआ है। मामला पुलिस तक पहुंचने और प्राथमिकी दर्ज नहीं होने की चर्चाओं के बीच अब भाजपा सांसद भारती पारधी और जिला भाजपा अध्यक्ष रामकिशोर कावरे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आखिर महिला सम्मान और नारी सशक्तिकरण की बात करने वाले राजनीतिक नेतृत्व की संवेदनशीलता उस समय कहां चली जाती है, जब महिलाओं के उत्पीड़न के आरोप अपनी ही पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों से जुड़े हों? क्या अमन गांधी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय संगठन के प्रभावशाली चेहरे उन्हें राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं?
अमन गांधी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं होने को लेकर उठे सवाल
दरअसल, गांधी परिवार में हुए पारिवारिक विवाद के मामले ने भाजपा नेतृत्व की चयन क्षमता को कटघरे में ला दिया है। पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सोहागपुरे का नाम भी पूर्व में सामने आए गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण राजनीतिक चर्चाओं में रहा है। अब अमन गांधी को संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि भाजपा में पदों के चयन का आधार आखिर संगठनात्मक क्षमता और स्वच्छ छवि है या प्रभावशाली राजनीतिक संपर्क? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अमन गांधी का नाम प्रारंभिक पैनल में शामिल नहीं था, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति हुई। चर्चाओं में रामकिशोर कावरे और भूपेंद्र सोहागपुरे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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महिला सम्मान की बात करने वाली भाजपा में महिला उत्पीड़न के आरोपों पर चुप्पी क्यों?
यह भी दावा किया जा रहा है कि सांसद भारती पारधी को विश्वास में लेकर नाम आगे बढ़ाया गया। लेकिन भाजपा नेतृत्व को अब इन सवालों का जवाब देना होगा। क्या पीड़ित महिलाओं को बिना किसी राजनीतिक दबाव के न्याय मिलेगा? क्या अमन गांधी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी? क्या सांसद भारती पारधी और भाजपा जिलाध्यक्ष पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सार्वजनिक रूप से पक्ष रखेंगे? महिला होना ही महिला सम्मान की गारंटी नहीं, असली परीक्षा तब होती है जब किसी पीड़ित महिला के साथ खड़े होने का समय आता है। बालाघाट की जनता यह जानना चाहती है कि भाजपा का महिला सम्मान का नारा केवल मंचों और भाषणों तक सीमित है या संगठन के भीतर भी उस पर अमल होता है।

