अमेरिका अब रूस से दुश्मनी भूल कर दोस्ती चाहता है, क्या सोचता है क्रेमलिन

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क, तथ्यवाणी। पल-पल बदल रहे भूराजनीतिक परिदृश्यों के चलते विश्व में शक्ति संतुलन बिगढ़ रहा है। जहां पहले एकध्रवीय पॉवर सेंटर अमेरिका हुआ करता था, वहीं अब रूस-चीन और भारत के साथ आने के बाद से ही यह स्थिति बदल चुकी है। अब हालात यह हैं कि रूस का धुरविरोधी रहा अमेरिका भी दुश्मनी भुला कर वांशिग्टन को क्रेमलिन के करीब लारना चाहता है। दरअसल, लगभग चार वर्षों से चले आ रहे यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष इसके पीछे सबसे बड़ी बजह मानी जा रही है।

जहां ट्रंप चाहते हैं कि उनके प्रयासों से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का अंत हो जाए और उनकी जो छबि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर धूमिल हुई है उसे पॉलिश किया जा सके। हालांकि इसी प्रयास में अलास्का में हुई पुतिन और ट्रंप की मुलाकात बेनतीजा रही थी और फिर एक समझौते का मसौदा पब्लिक डोमेन में आ गया था जिसके बाद युद्ध विराम नहीं हो सका। दुनिया की राजनीति बढ़े ही नाटकीय ढंग से बदल रही है, जहां रूस पर वैश्विक प्रतिबंध अमेरिका की अगुवाई में लगाए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत और रूस के आपसी संबंध अमेरिका के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रगाढ़ हुए हैं, इसकी झलक गत दिनों पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान दिखाई दिए।

बस यही कारण है कि डोनॉल्ड ट्रंप भी अब रूस के साथ शीतकालीन युद्ध के दौर से चले आ रही दुश्मनी को भुलाकर पुतिन को दोस्त बनाना चाहते हैं।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्रि पेस्कोव ने राज्य टेलीविजन को बताया कि जो बदलाव हम देख रहे हैं, वे कई मायनों में हमारी दृष्टि के अनुरूप हैं। यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रंप रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रति नरमी दिखा रहे हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर ट्रंप खुलकर पुतिन की तारीफ कर चुके हैं।
ट्रंप प्रशासन का यह फैसला पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और बाइडेन प्रशासन की नीतियों से बिल्कुल उलट नजर आ रहा है। 2014 में क्रीमिया को रूस में मिलाने और 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से अमेरिका लगातार रूस को बड़ा खतरा मानता रहा है। इसके बाद से अमेरिका रूस को हमेशा एक आक्रामक और वैश्विक व्यवस्था को बिगाड़ने वाला देश बताता रहा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी नई रणनीति फ्लेक्सिबल रियलिज्म के सिद्धांत पर आधारित है।
कहा गया है कि अमेरिका अब रूस के साथ दुश्मनी बढ़ाने के बजाय स्ट्रेटजकि स्टेकबिलिटी बहाल करना चाहता है। इसमें मोनरो सिद्धांत को फिर से लागू करने का सुझाव दिया गया है, जो पश्चिमी गोलार्ध को अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र के रूप में मानता है। इसके अलावा, रणनीति में यूरोप पर चेतावनी दी गई है कि वह सभ्यता के विनाश का सामना कर रहा है। इसमें कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत करना अमेरिका की प्राथमिकता है और वॉशिंगटन का लक्ष्य रूस के साथ रणनीतिक स्थिरता स्थापित करना है।
ट्रंप की रणनीति और रूस की सोच में मेल
रूसी प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका की नई रणनीति नाटो के लगातार फैलते सैन्य गठबंधन की धारणा को खत्म करने और वास्तविकता को रोकने के वादे के अनुरूप है, जो क्रेमलिन के लिए उत्साहजनक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप भले ही अच्छे इरादे रखते हों, लेकिन अमेरिका का डीप स्टेट यानी वहां की नौकरशाही और पुरानी व्यवस्था ट्रंप की राह में रोड़े अटकाएगी। अमेरिकी डीप स्टेट की सोच ट्रंप से बिल्कुल अलग है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और चीन पर भी बात
नई रणनीति में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख क्षेत्र बताया गया है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ताइवान पर चीन के साथ किसी संघर्ष को रोकने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेंगे।