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बन्डा शराब कांड में बड़ा खुलासा ,दिल्ली – ग्वालियर से सामान लाकर बनाते थे ‘मौत का ब्रांड’

सागर:जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई 37 मौतों के मामले में पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है। इस अंतरराज्यीय रैकेट की जड़ें दिल्ली, ग्वालियर, मुरैना और कानपुर तक फैली हैं।
यह एक ऐसा खतरनाक सिंडिकेट था, जो लाइसेंसधारी शराब ठेकेदारों के संरक्षण में खुलेआम मौत का जहरपरोस रहा था। पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने इस पूरे रैकेट का खुलासा किया है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली से थिनर और ग्वालियर से खाली बॉटल व पैकेजिंग सामग्री मंगाकर नकली शराब बनाई जा रही थी। शराब ठेकों में पार्टनरशिप करके नकली शराब खपाने की योजना थी। ग्वालियर व अन्य स्थानों पर छापा मारकर 4 डाई मशीनें, 11,050 खाली बोतलें और भारी मात्रा में कच्चा माल जब्त किया है। दिल्ली से केमिकल सप्लाई करने वाले व्यापारी को भी पुलिस ने पकड़ा है। अब तक 52 नामजद आरोपियों में से 37 को गिरफ्तार कर लिया है।
ग्वालियर के बहोड़ापुर क्षेत्र के जेवरा का पुरा में राजू सेंगर के पास से 11,050 खाली बोतलें, बॉम्बे लिखी डाई और कैप्सूल जब्त किए गए। वहीं पंकज राय की राय कॉलोनी (ग्वालियर) स्थित अवैध फैक्ट्री पर दबिश देकर 180 एमएल की ब्रांडेड और प्लेन बोतलें बनाने वाली डाई मशीनें बरामद की गईं।

चंदू के घर से चल रही थी नकली शराब की फैक्ट्री

नकली शराब बनाने के लिए एक नई टीम तैयार की गई थी। शिवांजय और रोहित ने ही चंदू राजा उर्फ चंद्रभान को नकली शराब बनाने का आइडिया दिया था। इसके बाद चंदू राजा ने अधिक मुनाफे के लालच में ग्राम ततरवारा स्थित अपने घर पर ही दिनेश शिवहरे को नकली शराब बनाने की छूट दे दी।

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दिल्ली से 5 प्लास्टिक ड्रमों में आया था केमिकल

दिनेश शिवहरे ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट के जरिए शराब की खाली बोतलें और पैकेजिंग सामग्री प्लास्टिक की बोरियों में सागर मंगवाईं। नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला घातक लिक्विड दिल्ली से 5 प्लास्टिक ड्रमों में ट्रांसपोर्ट के जरिए सागर भेजा गया था। दिल्ली के आरएन केमिकल्स फर्म का मालिक अनुपम गिरी इस जहरीले केमिकल की सप्लाई का मुख्य सौदागर था, जिसे पुलिस ने दबोच लिया
पुलिस पड़ताल में खुलासा हुआ है कि नकली शराब चखने से दिनेश शिवहरे की मौत हो गई थी और साथी देवा जाटव की आंखों की रोशनी चली गई।

दिनेश 4 सितंबर को बंसल अस्पताल में भर्ती हुआ था।चंदू व उसके साथी उसे देखने पहुंचे, लेकिन फंसने के डर से उन्होंने शराब के जहरीले होने की बात दबा दी। सच छिपाने के ठीक 24 घंटे बाद यानी 5 सितंबर से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। आरोपी वक्त रहते सच बता देते तो कई बेगुनाहों की जान बच सकती थी।

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