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₹22 हजार करोड़ के दावों पर सिर्फ ₹6.25 करोड़ का भुगतान! सुभाष चंद्रा के प्लान के खिलाफ NCLAT जाएंगे बैंक

नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के कर्ज भुगतान प्रस्ताव को लेकर कानूनी विवाद तेज हो गया है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें सुभाष चंद्रा के ₹6.25 करोड़ के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी गई है। तीनों वित्तीय संस्थान अब इस मामले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में ले जाएंगे।

₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ का प्रस्ताव

NCLT ने 25 अगस्त को सुभाष चंद्रा के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कुल ₹22,006.57 करोड़ के दावों के एवज में कर्जदाताओं को ₹6.25 करोड़ का भुगतान किया जाना है। इसके अलावा दिवालिया प्रक्रिया के खर्च के तौर पर ₹25 लाख अलग से दिए जाएंगे।

बैंकों का कहना है कि इस योजना के लागू होने पर उन्हें अपने दावों की तुलना में बेहद कम राशि मिलेगी। इस हिसाब से कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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पर्सनल गारंटी से जुड़ा है मामला

यह मामला उन व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ा है, जो सुभाष चंद्रा ने एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी थीं। कंपनियों के लोन से जुड़े दावों के आधार पर वित्तीय कर्जदाताओं ने चंद्रा के खिलाफ दावे पेश किए थे।

अब NCLT से मंजूरी मिलने के बाद भी इस समाधान योजना पर विवाद खत्म नहीं हुआ है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है।

80.81% वोटिंग शेयर वाले कर्जदाताओं ने किया समर्थन

केनरा बैंक ने बताया कि उसने इस रीपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था और मामले की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी उठाई थी। हालांकि, बैंक के पास महज 1.60 प्रतिशत वोटिंग शेयर होने के कारण उसकी मांग को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

इस प्रस्ताव को करीब 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर रखने वाले अन्य वित्तीय कर्जदाताओं का समर्थन मिला था। आवश्यक बहुमत मिलने के बाद NCLT ने योजना को मंजूरी दे दी। अब विरोध करने वाले बैंक इस फैसले को NCLAT में चुनौती देंगे।

₹22 हजार करोड़ के दावे पर सुभाष चंद्रा की सफाई

दूसरी ओर, सुभाष चंद्रा ने ₹22,000 करोड़ से अधिक के दावों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि यह रकम उनकी ओर से व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लिया गया कर्ज नहीं है, बल्कि एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के लोन के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित है।

चंद्रा के अनुसार, योजना का विरोध कर रहे कर्जदाताओं का वास्तविक दावा ₹22,000 करोड़ नहीं, बल्कि करीब ₹3,992 करोड़ है। उन्होंने कहा कि उनका समूह बकाया मामलों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

अब इस मामले पर सबकी नजर NCLAT के फैसले पर रहेगी, जहां बैंकों की अपील के बाद ₹6.25 करोड़ के रीपेमेंट प्लान की कानूनी वैधता और शर्तों की दोबारा जांच हो सकती है।

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