विदिशा/ग्यारसपुर: संकुल धामनोद के अंतर्गत आने वाली एकीकृत माध्यमिक शाला सेमरा टप्पा में बच्ची के घायल होने का मामला तूल पकड़ने के बाद आखिरकार शिक्षा विभाग हरकत में आया है। विभाग ने शाला प्रभारी मंजू सोनी और संबंधित जनशिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या नोटिस जारी करने से ही स्कूल की समस्याओं का समाधान हो जाएगा या फिर जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई भी की जाएगी?
दरअसल, स्कूल के जर्जर बाथरूम की दीवार गिरने से एक छात्रा के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। इस घटना के बाद स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसके साथ ही मध्यान्ह भोजन में अनियमितताओं और स्कूल भवन की बदहाल स्थिति को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। मामला मीडिया में प्रमुखता से उठने के बाद अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और जांच कर प्रतिवेदन तैयार किया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने शाला प्रभारी और संबंधित जनशिक्षक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। लेकिन कार्रवाई को लेकर विभाग के भीतर ही असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। पहले जिम्मेदारों को निलंबित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब नोटिस जारी कर जवाब मांगे जाने तक कार्रवाई सीमित नजर आ रही है।
अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का कहना है कि उन्होंने डीपीसी को पत्र लिखा है। वहीं, डीपीसी आरपी लखेर ने ऐसा कोई पत्र मिलने से इनकार किया है। अधिकारियों के इन अलग-अलग बयानों से मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर पत्र लिखा गया है तो वह संबंधित अधिकारी तक क्यों नहीं पहुंचा? और यदि पत्र नहीं मिला, तो कार्रवाई की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है?
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अब खानापूर्ति होगी या व्यवस्था में सुधार?
स्कूल में बच्ची के घायल होने की घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। जर्जर भवन, मध्यान्ह भोजन की कथित अनियमितताएं और शिकायतों के बाद शुरू हुई कार्रवाई ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अब देखना होगा कि नोटिस के बाद विभाग केवल जवाब लेकर मामले को समाप्त कर देगा या फिर स्कूल की जर्जर इमारत की मरम्मत, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में सुधार और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएगा। छात्र और अभिभावक स्कूल की व्यवस्था में वास्तविक सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

