बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार रात आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। 7.4 तीव्रता के इस भूकंप में अब तक 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 600 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में इमारतें ढह गईं और हजारों घरों को नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन के अनुसार, देशभर में 86 इमारतें पूरी तरह गिर गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा मकानों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 18 स्वास्थ्य केंद्र और 52 स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा कारणों से सात एयरपोर्ट पर अस्थायी रूप से संचालन रोक दिया गया है।
राष्ट्रपति ने आपातकालीन बैठक बुलाकर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी है। प्रभावित इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और बड़ी संख्या में बचाव दल तैनात किए गए हैं।
परेरा शहर में सबसे ज्यादा तबाही, 60 लोगों की मौत
भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित परेरा शहर रहा, जहां अकेले 60 लोगों की जान चली गई। करीब 5 लाख आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है।
राजधानी बोगोटा समेत कई बड़े शहरों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। घबराए लोग सुरक्षा के लिए घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए।
चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको क्षेत्र में सैन जोसे डेल पालमार के पास बताया गया है। भूकंप की गहराई करीब 107 किलोमीटर थी।
चोको और रिसाराल्डा इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है।
बोगोटा से भेजे जाएंगे 100 रेस्क्यूकर्मी
बोगोटा प्रशासन ने राहत सामग्री जुटाने के लिए छह कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। यहां पानी, कंबल, पैक्ड फूड, हाइजीन किट और प्राथमिक उपचार सामग्री जमा की जा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान तेज करने के लिए राजधानी बोगोटा से करीब 100 रेस्क्यूकर्मियों को भेजने की तैयारी की जा रही है।
कोलंबिया में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
कोलंबिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यहां हर साल छोटे-बड़े हजारों भूकंप दर्ज किए जाते हैं।
इसकी सबसे बड़ी वजह देश की भौगोलिक स्थिति है। कोलंबिया ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें लगातार सक्रिय रहती हैं।
यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी प्लेटों के बीच लगातार टकराव होता है। एक प्लेट के दूसरी प्लेट के नीचे जाने की प्रक्रिया से धरती के अंदर ऊर्जा जमा होती है और अचानक रिलीज होने पर शक्तिशाली भूकंप आते हैं।

