अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब गर्भगृह के पास स्थित उस विशेष लॉकर का सत्यापन किया है, जिसमें श्रद्धालुओं की ओर से रामलला को अर्पित किए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। इससे पहले ट्रस्ट के बैंक लॉकर में रखे आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं की जांच और वीडियोग्राफी की जा चुकी है।
इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीए नरपत डुकिया को राम मंदिर संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है। मंदिर प्रशासन में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब चढ़ावे और दान की वस्तुओं से जुड़े मामले की जांच चल रही है।
SIT ने दान रसीदों से आभूषणों का किया मिलान
सूत्रों के मुताबिक, गर्भगृह के पास स्थित विशेष लॉकर में केवल बहुमूल्य आभूषण और कीमती भेंट सुरक्षित रखी जाती हैं। एसआईटी ने जांच के दौरान लॉकर में मौजूद वस्तुओं का ट्रस्ट के रिकॉर्ड और संबंधित दान रसीदों से मिलान किया।
जिन श्रद्धालुओं ने रामलला को सोना, चांदी या अन्य कीमती आभूषण अर्पित किए थे, उनकी रसीदों के आधार पर यह सत्यापित किया गया कि संबंधित वस्तुएं लॉकर में सुरक्षित मौजूद हैं। जांच के दौरान दान रसीदों, अभिलेखों और लॉकर में रखे आभूषणों का बिंदुवार मिलान किया गया।
आभूषणों की पहले होती है तौल, फिर लॉकर में रखे जाते हैं
मंदिर में जब कोई श्रद्धालु रामलला को सोना, चांदी अथवा अन्य बहुमूल्य आभूषण अर्पित करता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी तौल की जाती है। इसके लिए गर्भगृह के समीप इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन की व्यवस्था है।
तौल और रिकॉर्ड तैयार करने के बाद श्रद्धालु को रसीद दी जाती है। इसके बाद संबंधित आभूषण को सुरक्षित रखने के लिए विशेष लॉकर में जमा किया जाता है।
तीन चाबियों से खुलता है गर्भगृह के पास रखा लॉकर
बताया जाता है कि इस विशेष लॉकर को खोलने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। लॉकर की तीन चाबियां हैं। इनमें एक चाबी वर्तमान में मंदिर संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे नरपत डुकिया के पास है, जबकि दूसरी दो चाबियां शैलेंद्र शुक्ल और विंदेश्वरी सिंह के पास सुरक्षित रहती हैं।
निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक समन्वय के बाद ही लॉकर खोला जाता है।
जगदीश आफले को बनाया गया सचिव
राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का संचालन देख रहे इंजीनियर जगदीश आफले को सचिव की जिम्मेदारी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन ट्रस्ट द्वारा जारी किए जा रहे विभिन्न पत्रों में जगदीश आफले को सचिव के रूप में संबोधित किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि 2 सितंबर को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
नरपत डुकिया संभालेंगे मंदिर संचालन और प्रबंधन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने के लिए सीए नरपत डुकिया को मंदिर संचालन एवं प्रबंधन का इकाई प्रमुख नियुक्त किया है।
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन की ओर से जारी आदेश के अनुसार मंदिर संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी डुकिया को दी गई है। उनके सहयोगी के रूप में आचार्य इंद्रदेव मिश्र को नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 तक रहेगा।
नरपत डुकिया को ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव के करीबी माना जाता है। नई जिम्मेदारी के तहत वे मंदिर की समग्र प्रशासनिक व्यवस्था का समन्वय, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल, व्यवस्थाओं की निगरानी और ट्रस्ट के निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
ट्रस्ट की नई व्यवस्था में प्रशासनिक प्रबंधन और धार्मिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग रखते हुए दोनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य राम मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

