भोपाल: बालाघाट में मौत के घाट उतर गए बैगा आदिवासी 43 बच्चों की जिंदगी क्या बचाई जा सकती थी। कोरोना महामारी के दौरान हजारों जिदंगियों को बचाने वाले कोरोना योद्धा ये दावा कर रहे हैं कि ये मुमकिन था। कोरोना के बीत जाने के बाद अपनी अस्थाई नौकरियों से बाहर हुए इन कोरोना योद्धाओं ने सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें मध्य प्रदेश के ऐसे ही ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में तैनात कर दिया जाए जहां स्वास्थ्य सेवाएं सपना हैं। भोपाल में धरने पर बैठे इन कोरोना योद्धाओं का आरोप है कि, उनसे वादा किया गया था कि मुश्किल समय में संकट मोचक बने इन योद्धाओं की चिंता सरकार करेगी
सरकार हमारी नहीं सुन रही
2020 में कोरोना महामारी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में मजबूत पिलर की तरह जुड़े कोरोना योद्धाओं का कहना है कि, अगर हमारी तैनाती स्वास्थय विभाग के जरिए ग्रामीण सुदूर इलाकों में कर दी जाती तो बालाघाट के इन 43 बच्चों को बचाया जा सकता था। हमारी मांग है कि ऐसी जगहों पर हमारी नियुक्ति की जाए, हम सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। लेकिन सरकार हमारी सुनने तैयार नहीं है।
वादे से क्यों मुकर गई सरकार ?
कोरोना योद्धाओं का कहना है कि, 2020-21 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बालाघाट से कहा था कि, कोरोना योद्धा का कुछ बुरा नहीं होगा। लेकिन बड़े शर्म की बात है कि सरकार अपने वादे से मुकर गई है।
भोपाल में धरना
भोपाल के नीलम पार्क में कोविड-19 आयुष चिकित्सक सेवा बहाली की मांग को लेकर धरने पर बैठे।चिकित्सकों का कहना है कि करीब दो साल सेवा लेने के बाद 1 अप्रैल 2022 से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।कोरोना काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मी अब सरकार से दोबारा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
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कोरोना योद्धाओं ने रखी मांगे, कहा-जल्द सेवा में बहाली हो
मध्य प्रदेश के चार हजार से ज्यादा कोरोना योद्धाओं ने मांग पत्र भी बनाया है। इसमें कोविड-19 महामारी के दौरान सेवाएं देने वाले कोरोना योद्धाओं की सेवा बहाली अथवा पुनर्नियोजन किया जाए। स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में उपलब्ध रिक्त पदों पर कोविड कोरोना योद्धाओं को उनकी योग्यता एवं अनुभव के आधार पर रोजगार का अवसर देने के लिए विशेष नीति बनाई जाए। कोविड कर्मचारियों की सेवा समाप्ति एवं वर्तमान स्थिति को देखते हुए पुनर्नियोजन के लिए स्पष्ट नीति एवं कार्ययोजना बनाई जाए। कोरोना योद्धाओं के अनुभव को शासन की आगामी स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग किया जाए।

