नई दिल्ली। बीजेपी ने नितिन नवीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर संगठन में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। आरएसएस के मानदंडों और मोदी‑शाह की पसंद पर हुआ यह चयन पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति है।
बीजेपी ने बिहार के विधायक और मंत्री नितिन नवीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर संगठनात्मक राजनीति में नया अध्याय शुरू किया है। इसके साथ ही जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसे 2024 के बाद एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।
बिहार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन का चयन यूं ही नहीं हुआ। वे आरएसएस के मानदंडों पर खरे उतरते हैं और जमीनी संगठन से जुड़े रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सहमति से लिया गया।
इस नियुक्ति को बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नवीन की उम्र 45 वर्ष है, जो यह संकेत देती है कि पार्टी भविष्य की राजनीति के लिए युवा नेतृत्व को तैयार कर रही है। इससे पहले भी संघ ने ऐसा ही प्रयोग नितिन गडकरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर कर ठोस संदेश दिया था।
दिल्ली की राजनीति से बाहर रहकर संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नितिन नबीन का चयन यह दर्शाता है कि बीजेपी नेतृत्व को विकेंद्रीकृत रखना चाहती है। पार्टी की नजर जमीनी स्तर से जुड़े नेताओं को आगे लाने पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पार्टी संगठन में 45 से 55 वर्ष आयु वर्ग के नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इससे युवा चेहरों को अवसर मिलेगा और अनुभवी नेताओं को नीति निर्धारण में शामिल रखा जाएगा।
नितिन नवीन की ताजपोशी, बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत


