नई दिल्ली: विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले Foreign Contribution (Regulation) Act यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर शुक्रवार से संसदीय स्तर पर मंथन शुरू हो रहा है। Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 की जांच के लिए बनाई गई Joint Parliamentary Committee (JPC) की आज पहली बैठक है। बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारी समिति के सदस्यों को बिल के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देंगे।
31 सदस्यीय JPC की अध्यक्षता भाजपा सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। बिल को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और अगस्त में इसे विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया।
आखिर FCRA बिल पर विवाद क्यों?
FCRA के जरिए भारत में व्यक्तियों और संगठनों को मिलने वाले विदेशी अंशदान यानी Foreign Contribution को नियंत्रित किया जाता है। 2026 के संशोधन बिल में खास तौर पर उन संगठनों के विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नया ढांचा प्रस्तावित किया गया है, जिनका FCRA Certificate रद्द हो जाता है, संगठन उसे Surrender कर देता है या उसका Certificate समाप्त हो जाता है।
इसके लिए Designated Authority बनाने का प्रस्ताव है। यह Authority ऐसी स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों की देखरेख, प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर Disposal से जुड़े काम संभालेगी। यही प्रावधान राजनीतिक और नागरिक समाज की बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग तर्क
केंद्र सरकार का तर्क है कि FCRA व्यवस्था में बदलाव से विदेशी फंड के इस्तेमाल की निगरानी मजबूत होगी और ऐसे धन का उपयोग राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ होने से रोकने में मदद मिलेगी।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और कुछ नागरिक व धार्मिक संगठनों ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित प्रावधान सरकार को विदेशी फंड लेने वाले NGOs और संस्थानों की संपत्तियों पर ज्यादा नियंत्रण दे सकते हैं। सरकार इन आशंकाओं से असहमति जताती रही है।
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बिल में और क्या बदलाव?
प्रस्तावित कानून में FCRA Certificate समाप्त होने के बाद विदेशी फंड के इस्तेमाल पर रोक और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन के नियम शामिल हैं। इसके साथ कुछ उल्लंघनों के लिए अधिकतम जेल की सजा को पांच साल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव भी है।

