मंडला: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का खतरा लगातार बढ़ रहा है। रविवार को मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती एक मादा बाघ शावक की इलाज के दौरान मौत हो गई। प्राथमिक जांच में मौत की वजह वायरस का घातक संक्रमण मानी जा रही है। इसके साथ ही इस संक्रमण से जान गंवाने वाले बाघों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है।
वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने शावक को बचाने के लिए लगातार उपचार किया, लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। मौत के बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत शव का दाह संस्कार कर दिया।
8 अक्टूबर को किया गया था रेस्क्यू
वन विभाग की टीम ने 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट के अंतर्गत अरौली गांव के पास से मादा बाघ शावक को रेस्क्यू किया था। शावक की तलाश के लिए हाथियों की मदद ली गई। रेस्क्यू के समय उसकी शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर थी। इसके बाद उसे तत्काल मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र पहुंचाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया था।
ग्रामीण महिला पर किया था हमला
शावक को रेस्क्यू करने से एक दिन पहले, 7 अक्टूबर की रात उसने अरौली गांव में एक महिला पर हमला कर दिया था। खटिया रेंज की मोहगांव बीट में रहने वाली 50 वर्षीय रमली बाई मरावी अपने घर के आंगन में खाट पर सो रही थीं। इसी दौरान शावक ने उनके सिर और चेहरे पर पंजों से हमला किया और उन्हें खाट से नीचे खींच लिया।
महिला की चीख सुनकर उनका बेटा बाहर आया और मदद के लिए शोर मचाया। आसपास के लोगों की आवाज सुनकर शावक महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
यह भी पढ़ें: एशियन पैरा गेम्स 2026: भारत ने जीते 11 पदक, निषाद-सौम्या और रिंकू ने दिलाया स्वर्ण
बाघों की सुरक्षा के लिए बढ़ी चुनौती
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस वन्यजीवों, खासकर बाघों और अन्य मांसाहारी प्रजातियों के लिए गंभीर खतरा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में इस संक्रमण से नौ बाघों की मौत हो चुकी है। मादा शावक की मौत के बाद पार्क प्रबंधन के सामने अन्य बाघों को संक्रमण से बचाने और प्रभावित वन्यजीवों की निगरानी की चुनौती बढ़ गई है।

